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गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में भ्रूण का लिंग परीक्षण करने और अवैध गर्भपात कराने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने शनिवार देर रात महामाया स्टेडियम के पास घेराबंदी कर एक अस्पताल संचालक सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके पास से चीन निर्मित पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन, एक कार, उपकरण और २० हजार रुपये नकद बरामद किए हैं। आरोपी इतने शातिर थे कि पकड़े जाने के डर से चलती कार में ही पोर्टेबल मशीन से लिंग जांच के खेल को अंजाम देते थे।

 एसीपी कोतवाली उपासना पांडेय ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संदीप (अस्पताल संचालक, बागपत), तस्लीम (बुलंदशहर), सलमान (गढ़मुक्तेश्वर) और साहिद (सिहानी, गाजियाबाद) के रूप में हुई है। आरोपी संदीप लोनी में बंथला फ्लाईओवर के पास स्थित ‘साईं अस्पताल’ का संचालक है, जो पहले भी ऐसे मामलों में जेल जा चुका है। पूछताछ में सामने आया है कि यह गिरोह पिछले ६ सालों से सक्रिय था और अब तक करीब २०० से अधिक महिलाओं की अवैध जांच कर चुका है। इनके नेटवर्क के तार हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों से भी जुड़े हुए थे, जहां से महिलाएं जांच के लिए गाजियाबाद आती थीं।

पीसीपीएनडीटी (PCPNDT) के नोडल अधिकारी व उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनुराग संजोग ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि बरामद की गई चीनी पोर्टेबल मशीन को अवैध तरीके से नेपाल के रास्ते भारत लाया गया था। जहां मान्यता प्राप्त मेडिकल मशीनें ५ से २५ लाख रुपये की आती हैं, वहीं यह चीनी मशीन मात्र २ से ३ लाख रुपये में मिल जाती थी।

पूछताछ में आरोपी तस्लीम ने कबूला कि वे केवल लिंग जांच के लिए १५ से २० हजार रुपये वसूलते थे, जबकि जांच और गर्भपात (Abortion) दोनों का पूरा पैकेज ५० से ६० हजार रुपये का होता था। इस रैकेट में सरकारी और निजी अस्पतालों के बाहर दलाल सक्रिय रहते थे, जिन्हें प्रति केस २,५०० से १०,००0 रुपये तक का कमीशन दिया जाता था। पुलिस को शक है कि इस नेटवर्क में कुछ आशा कार्यकर्ता भी शामिल हो सकती हैं, जिसकी गहनता से जांच की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, नियमों के उल्लंघन पर पिछले एक साल में ९ सेंटर्स के रजिस्ट्रेशन सस्पेंड किए जा चुके हैं, जबकि ३६ अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर केस दर्ज है।

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