Headline
’‘मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ के द्वितीय चरण का मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ’
’उत्तराखण्ड में बनेगा संस्कृत आयोग, सरकार ने मांगे सुझाव’
आम महोत्सव में बोले मुख्यमंत्री धामी – किसान उत्तराखंड की सबसे बड़ी ताकत, हरिद्वार बनेगा विकास की नई पहचान
कांवड़ यात्रा के सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं सफल आयोजन के लिए  सभी तैयारियां समय से पूर्ण करें : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार गंगा कॉरिडोर के अंतर्गत लगभग 235 करोड़ रुपये की चार महत्वपूर्ण परियोजनाओं का किया भूमि पूजन एवं शिलान्यास
विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने की मुहिम बढ़ी आगे, जापानी प्रतिनिधिमंडल ने क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय एवं दून विश्वविद्यालय का किया भ्रमण
जनता मिलन कार्यक्रम में डीएम ने सुनीं जनशिकायतें, अधिकांश मामलों का मौके पर हुआ समाधान
वन भूमि हस्तांतरण प्रकरणों का समय से करें निस्तारण : महाराज
सभी सरकारी विश्वविद्यालय अपने 5 वर्ष का प्लान करें तैयार- मुख्य सचिव

नई दिल्ली। चेन्नई के 30 वर्षीय तानसेन दोनों हाथों से विकलांग है। तानसेन ने 10 साल की उम्र में एक विद्युत दुर्घटना में अपने दोनों हाथ खो दिए थे. वह अपनी मारुति स्विफ्ट कार अपने पैरों से चलाते हैं. अब उन्होंने ड्राइविंग लाइसेंस भी हासिल कर लिया है. वह विकलांग होते हुए भी ड्राइविंग लाइसेंस पाने वाले तमिलनाडु के पहले शख्स बन गए हैं। तानसेन ने बाधाओं को तोड़ते हुए एक उदाहरण पेश किया. उन्हें 22 अप्रैल 2024 को अपना ड्राइविंग लाइसेंस मिला. उन्होंने पेरम्बूर में अपनी पढ़ाई पूरी की और फिलहाल में एलएलएम कर रहे हैं।

लाइसेंस पाने के लिए किससे मिली प्रेरणा
लाइसेंस प्राप्त करने की उनकी इच्छा तब जगी जब उन्हें मध्य प्रदेश के एक व्यक्ति विक्रम अग्निहोत्री के बारे में पता चला, जिसने दोनों हाथ कटे होने के बावजूद वर्षों पहले लाइसेंस प्राप्त कर लिया था. केरल की एक महिला, जिलुमोल मैरिएट थॉमस भी लाइसेंस प्राप्त करने में सफल रहीं, जिससे तानसेन को और प्रेरणा मिली।

उन्होंने बताया, जब मैं 10 साल का था तो मेरे साथ एक दुर्घटना हुई और मैं विकलांगता का शिकार हो गया. मैंने अपनी डिग्री पूरी कर ली है। जब मैं 18 साल का हुआ, तो मेरे सभी दोस्तों को उनके लाइसेंस मिल गए. उस समय मुझे बहुत बुरा लगा. क्योंकि मैं लाइसेंस नहीं ले सका या कार नहीं चला सका. तब मैंने सोचा कि लाइसेंस प्राप्त करना मेरे लिए महत्वपूर्ण चीज है, मैंने मध्य प्रदेश से अग्निहोत्री सर के बारे में खबर सुनी उनसे भारत में बिना हाथों के लाइसेंस पाने के लिए मुझे प्रेरणा मिली. हाल ही में केरल में एक लड़की को भी लाइसेंस मिला।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top