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नई दिल्ली – मंगलवार को चुनाव आयोग के प्रमुख राजीव कुमार ने 47 विधानसभा और 2 लोकसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव की तारीखों का ऐलान किया। इसके बाद केरल की खाली पड़ी वायनाड लोकसभा सीट एक बार फिर चर्चा में आ गई। चुनाव आयुक्त ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि वायनाड में 13 नवंबर को उपचुनाव होंगे, इसी दिन महाराष्ट्र और झारखंड में भी विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होगी।

वायनाड उपचुनाव की तारीख का ऐलान होते ही कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा छोड़ी गई इस सीट से अब उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा चुनावी मैदान में उतरेंगी। यह प्रियंका गांधी का पहला चुनाव होगा, जिससे उनका आधिकारिक राजनीतिक करियर शुरू होने जा रहा है।

राहुल जैसा प्रियंका को भी मिलेगा वायनाड का आशीर्वाद?
प्रियंका गांधी वाड्रा अब तक केवल अपने भाई राहुल गांधी के लिए चुनाव प्रचार करती आई हैं, लेकिन इस बार वे खुद वायनाड से चुनाव लड़ेंगी। वायनाड सीट को कांग्रेस की सुरक्षित सीट माना जाता है। 2019 के लोकसभा चुनाव में जब राहुल गांधी को अमेठी से हार का सामना करना पड़ा था, तब वायनाड ने उन्हें संसद तक पहुंचाया था।

कांग्रेस ने प्रियंका गांधी पर खेला दांव
इस बार राहुल गांधी ने रायबरेली और वायनाड दोनों सीटों से चुनाव लड़ा था और जीतने के बाद उन्होंने वायनाड सीट छोड़ने का फैसला किया। इसके बाद वायनाड सीट पर उपचुनाव होना तय हुआ। कांग्रेस ने प्रियंका गांधी वाड्रा को इस सीट से उम्मीदवार बनाने का ऐलान किया, जिससे यह उपचुनाव और भी महत्वपूर्ण हो गया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी प्रियंका गांधी के वायनाड से चुनाव लड़ने की संभावना पहले ही जताई थी।

अब 13 नवंबर को होने वाले उपचुनाव में प्रियंका गांधी पहली बार लोकसभा चुनाव में हिस्सा लेंगी और वायनाड के मतदाताओं से उनका सीधा संवाद होगा।

 

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