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नई दिल्ली: दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग में हुए कथित 650 करोड़ रुपये के दवा और उपकरण खरीद घोटाले में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) की जांच में अब मुख्य आरोपी और निजी सप्लायर राजीव रंगीला की भूमिका पूरी तरह सामने आ चुकी है। एफआईआर के मुताबिक, रंगीला का सरकारी खरीद व्यवस्था पर इस कदर दबदबा था कि विभाग के कई अधिकारी सिर्फ उसकी मुखौटा (शेल) कंपनियों के बिल पास करने का जरिया बनकर रह गए थे। फिलहाल आरोपी राजीव रंगीला फरार है और एसीबी की कई टीमें उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही हैं।

 जांच में सामने आया है कि सरकारी निविदा (टेंडर) प्रक्रिया को पूरी तरह से हाईजैक कर लिया गया था। पारदर्शिता को ठेंगा दिखाते हुए रंगीला ने दूसरों के नाम पर 5 मुखौटा कंपनियां—एफ मेड डिवाइसेज, टेक्नोक्रेट्स, राजश्री, आशी सर्जिकल एंड फार्मास्यूटिकल्स और एम साहिब एंड संस खड़ी कर रखी थीं। टेंडर के दौरान यही कंपनियां आपस में ही बोली लगाती थीं, जिससे बाहर से सब कुछ निष्पक्ष लगे, जबकि अंदरूनी तौर पर पूरा नियंत्रण अकेले रंगीला के हाथ में था।

 एसीबी के अनुसार, इन कंपनियों के पास न तो कोई पुराना अनुभव था और न ही जरूरी टर्नओवर, फिर भी अधिकारियों ने इन्हें तकनीकी रूप से योग्य (एलिजिबल) घोषित कर दिया। वहीं, असली सप्लायरों को बिना वजह रेस से बाहर कर दिया गया। इतना ही नहीं, खेल को छुपाने के लिए सरकारी पोर्टल पर फर्जीवाड़ा किया गया। जिन सामानों की सप्लाई और पेमेंट हो चुकी थी, उन्हें पोर्टल पर ‘प्रोसेस’ में दिखाया जाता रहा।

घोटाले का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जो सी-आर्म मशीन बाजार में करीब 25 लाख रुपये की आती है, उसे स्वास्थ्य विभाग को 1.10 करोड़ रुपये की भारी-भरकम कीमत पर बेचा गया।

इस महाघोटाले के खिलाफ राजनीतिक घमासान भी तेज हो गया है। बुधवार को लगातार तीसरे दिन जीटीबी अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे नेताओं ने कहा कि दिल्ली सरकार इस घोटाले की निष्पक्ष जांच कराने के बजाय इसे दबाने की कोशिश कर रही है। विपक्ष ने एलान किया है कि बृहस्पतिवार को बाबा साहब अंबेडकर अस्पताल के बाहर भी इस भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।

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