Headline
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम को लेकर राज्य स्तरीय अनुमोदन समिति की बैठक, मुख्य सचिव ने दिए अहम निर्देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ का शुभारंभ
हिमालय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ‘हिमालयो नाम नगाधिराजः’ कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री
श्रमिक अपने पसीने से प्रदेश के विकास की नई इबारत लिख रहे हैं : महाराज
महाराज ने मौके पर ही किया जन समस्याओं का निस्तारण, श्रम विभाग द्वारा आयोजित श्रमिक पंजीकरण एवं नवीनीकरण शिविर में किया प्रतिभाग
डीएम ने ईवीएम-वीवीपैट की सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा, निर्धारित प्रोटोकॉल के पालन के निर्देश
देहरादून में गूंजा गोर्खाली संस्कृति का रंग, सीएम धामी बोले- सरकारी स्तर पर और भव्य होगा हरितालिका तीज उत्सव
सीएम धामी ने ‘NeST Fest-2026’ में किया प्रतिभाग, पूर्वोत्तर के युवाओं का किया स्वागत
बिना मान्यता संचालित मदरसों पर धामी सरकार की कार्रवाई जारी, देहरादून-हल्द्वानी में कई मदरसे सील

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मिशन कर्मयोगी को शासन में बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि यह “शासन” से “भूमिका” की ओर आदर्श परिवर्तन का प्रतीक है। डॉ. सिंह, जो केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं, ने कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के अधिकारियों के साथ सामूहिक चर्चा के दौरान मिशन कर्मयोगी, राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह और कर्मयोगी योग्यता मॉडल पर चर्चा की।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जोर देकर कहा कि सिविल सेवकों को केवल शासन से नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारियों से बंधा होना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि मिशन कर्मयोगी की स्थापना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से हुई थी और इसके लिए क्षमता निर्माण आयोग (सीबीसी) की सराहना की।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मिशन कर्मयोगी ने प्रशासन में एक नई संस्कृति को जन्म दिया है, जो उत्तरदायी, गतिशील और समकालीन भारत के साथ जुड़ी हुई है। इसके माध्यम से नौकरशाहों को विभिन्न मंत्रालयों में बेहतर कामकाज के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है, जो सरकार के विविध कार्यों में सहायक साबित होगा।

डॉ. सिंह ने ‘एक सरकार’ दृष्टिकोण पर जोर दिया और बताया कि यह विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को पूरा करने के लिए एक मजबूत और सतत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि बदलते समय की मांग के अनुसार निरंतर सीखते रहना सिविल सेवकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

सामूहिक चर्चा के आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि इसका मकसद मंत्रालय के अधिकारियों को एक साथ लाना और चुने गए विषयों पर विचार-विमर्श के लिए एक मंच प्रदान करना है। इस चर्चा के माध्यम से अधिकारी राष्ट्रीय शिक्षण सप्ताह के दौरान आयोजित वेबिनार से प्राप्त जानकारी का आदान-प्रदान कर सकेंगे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस प्रकार का विचार-मंथन भारत के प्रशासनिक ढांचे को और सुदृढ़ बनाने के लिए एक विशाल पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में सहायक होगा, जो उद्योगों, विभागों और संपूर्ण सरकार के लिए फायदेमंद साबित होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top