Headline
युवाओं की प्रतिभा, मेहनत और लगन से साकार होगा विकसित भारत 2047 का संकल्प : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी लोकभाषाओं के वॉइस कलेक्शन पोर्टल का किया शुभारंभ
उत्तराखंड स्टेट ओपन कराटे चैंपियनशिप में बच्चों का शानदार प्रदर्शन
जयानंद भारती के भवन निर्माण हेतु 40 लाख की धनराशि स्वीकृत कराने पर महाराज का आभार जताया
मुख्यमंत्री ने पुलिस स्मृति दिवस पर शहीद जवानों को दी श्रद्धांजलि, परिजनों को किया सम्मानित
गला सूखने की समस्या को न करें नजरअंदाज, पानी पीने के बाद भी मुंह सूखने के हो सकते हैं ये 6 कारण
देहरादून के नकरौंदा स्थित होटल/होमस्टे में आबकारी विभाग की छापेमारी, शराब की बड़ी खेप बरामद
10 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद होंगे गंगोत्री धाम के कपाट
मुख्यमंत्री ने 20.55 करोड़ रुपये की पांच योजनाओं का किया शिलान्यास एवं लोकार्पण

नई दिल्ली। पिछले कई दशकों से इंजीनियरिंग भारतीय छात्रों का ड्रीम करियर रहा है। आईआईटी और एनआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से इंजीनियरिंग की डिग्री लेना सुरक्षित भविष्य और स्टेटस सिंबल माना जाता है। पर अब हालात बदल रहे हैं।

टीमलीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में आईआईटी के केवल 60 फीसदी ग्रेजुएट्स को ही प्लेसमेंट मिल पाई है, और कई छात्रों को 3-4 लाख रुपये का ही पैकेज मिला है। एनआईटी में भी 60 फीसदी से कम छात्रों को नौकरी मिल पाई है। रिपोर्ट बताती है कि 2024 में देशभर में 15 लाख इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स पास आउट होंगे, लेकिन इनमें से सिर्फ 10% को ही नौकरी मिलेगी।

रोजगार में गिरावट का कारण
टीमलीज के सीईओ एआर रमेश का कहना है कि इंजीनियरिंग छात्रों को नौकरी न मिलने के कई कारण हैं, जैसे रोजगार दर, इंडस्ट्री की मांग और स्किल गैप। 15 लाख में से केवल 60 फीसदी ही सक्रिय रूप से नौकरी खोजते हैं और सिर्फ 45 फीसदी इंडस्ट्री के मानकों को पूरा कर पाते हैं। इनमें से भी 25-30 फीसदी छात्रों के पास एआई जैसी नई तकनीक की स्किल नहीं होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कॉलेज और इंडस्ट्री के बीच लंबे समय तक समझौते हों, तो छात्रों के कौशल और इंडस्ट्री की मांग में आए अंतर को पूरा किया जा सकता है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top