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बिना तैयारी बैठक में पहुंचे अधिकारियों पर सीएम धामी सख्त, जताई कड़ी नाराजगी
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2014 के बाद प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में शुरू हुआ सनातन संस्कृति का स्वर्णिम काल – मुख्यमंत्री धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में जनसुनवाई कर लोगों की समस्याएं सुनीं।
राज्य के प्रत्येक विकासखंड में बालिकाओं के लिए एक-एक छात्रावास बनाया जाएगा- मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नगाण गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में हुए सम्मिलित

कोरोना महामारी के दौरान दुनिया भर में लोगों ने बाहर जाकर काम करने की बजाय घर से ही काम किया । उस दौर में वर्क फ्रॉम होम का चलन बढ़ा और लोगों को इससे फायदा भी हुआ. इतने दिनों बाद भी कई कंपनियां हैं जो अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम का ऑप्शन दे रही हैं । लेकिन लंबे समय तक वर्क फ्रॉम होम करने से लोगों की मेंटल हेल्थ पर बुरा असर पड़ा है. हाल ही में कराई गई एक स्टडी में पता चला है कि मेंटल हेल्थ को दुरुस्त रखने में वर्क फ्रॉम होम की जगह वर्क फ्रॉम ऑफिस ज्यादा बेहतर है ।

हाल ही में ग्लोबल स्तर पर कराई गई एक स्टडी में कहा गया है कि भारत में ऑफिस में काम करने वाले इम्पलॉयी की मेंटल हेल्थ घर से काम करने वालों की अपेक्षा अच्छी रहती है । इसमें कहा गया है कि यूरोप और अमेरिका के उलट भारत में दफ्तर से काम करने वालों को मानसिक सुकून मिलता है । यहां दफ्तर से काम करने वाले लोग घर से काम करने वाले या हाईब्रिड माहौल में काम करने वालों की अपेक्षा कम तनाव में रहते हैं ।

यूरोप और अमेरिका की बात करें तो स्टडी कहती है कि इन जगहों पर हाइब्रिड माहौल में काम करने वाले लोगों की मेंटल हेल्थ की अच्छी ग्रोथ होती है. अमेरिका में सेपियंस लैब में वर्क कल्चर एंड मेंटल वेलबीइंग द्वारा ये स्टडी करवाई गई थी. इस स्टडी के तहत करीब 55 हजार कर्मचारियों को इस रिसर्च में शामिल किया गया ।

इस स्टडी में पाया गया कि अकेले काम करने वालों की अपेक्षा टीम में काम करने वाले लोगों की मेंटल हेल्थ ज्यादा अच्छी थी. वहीं दूसरी तरफ टीम के आकार और मेंटल हेल्थ में ग्रोथ की बात करें तो इस मामले में  दूसरे देश भारत से ज्यादा बेहतर हैं. इस स्टडी में कोशेंट नामक नजरिए को एड किया गया ।

आपको बता दें कि वर्क लाइफ को बेहतर करने वाले पहलुओं में टीम भावना, प्रेशर,  स्ट्रेस, कंपटीशन, टॉक्सिक एनवायरमेंट, आपसी रिलेशनशिप, अपने काम के प्रति गर्व महसूस करना, लैंगिक भेदभाव, काम के प्रति रुचि आदि पहलू शामिल हैं ।

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