Headline
मुख्यमंत्री धामी ने समस्त प्रदेशवासियों को दी ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ की हार्दिक शुभकामनाएं
चारधाम यात्रा 2026 को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त बनाने का ऐतिहासिक पहल , ड्रोन से होगी कूड़ा और प्लास्टिक वेस्ट की मॉनिटरिंग
’मुख्यमंत्री धामी ने चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं की मंगलमय यात्रा की दी शुभकामनाएं’
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऋषिकेश से चार धाम जाने वाली बसों को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना
CM हेल्पलाइन 1905 पर लंबित शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया जाए – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने लोक निर्माण विभाग की मास्टर प्लान पुस्तिका का किया विमोचन
सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायत की पड़ताल करने खुद मौके पर पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
नारी शक्ति वंदन अधिनियम, महिला सशक्तिकरण की दिशा में युगांतकारी कदम – मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
“युवा शक्ति ही राष्ट्र निर्माण की असली ताकत” – सीएम धामी

नई दिल्ली। राम नवमी इस बार 17 अप्रैल 2024 को मानाई जाएगी. इस साल की रामनवनी बेहद खास होने वाली है। क्योंकि अब रामलला अपने जन्म स्थल पर भव्य मंदिर में विराजमान हैं। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली रामनवमी कई मायनों में ऐतिहासिक बनेगी। 500 साल बाद रामलला का भव्य जन्मोत्सव मनाने की तैयारी हो रही है। इसे खास बनाने के लिए जो आयोजन किए जा रहे हैं उसमें रामलला के माथे पर सूर्य किरणों को पहुंचाने के लिए वैज्ञानिकों की मदद ली जा रही है। जानिए ये कैसे मुमकिन होगा, इसके लिए क्या किया जा रहा है।

इसी क्रम में रामनवमी के दिन रामलला के जन्म की घड़ी दोपहर ठीक 12 बजे सूर्य की रश्मियों से रामलला का अभिषेक यानी सूर्य तिलक होगा। सूर्य की किरणें करीब चार मिनट तक रामलला के मुख मंडल को प्रकाशित करेंगी। यह सर्कुलर सूर्य तिलक 75 मिमी का होगा। इसी रामनवमी को रामलला का सूर्य तिलक करने की तैयारी में वैज्ञानिक जुटे हुए हैं। राममंदिर में उपकरण लगाए जा रहे हैं, जल्द ही इसका ट्रायल भी किया जाएगा। यह खास तिलक हर साल सिर्फ रामनवमी के मौके पर ही दिखाई देगा। मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थापित किए जाने वाले ऑप्टोमैकेनिकल सिस्टम में हाई क्वालिटी मिरर, एक लेंस और खास कोणों पर लगे लेंस के साथ वर्टिकल पाइपिंग शामिल है। मंदिर के ग्राउंड फ्लोर पर दो मिरर और एक लेंस फिट किए जा चुके हैं। तीसरे फ्लोर पर जरूरी उपकरण लगाए जा रहे हैं।

सूर्य की रोशनी तीसरे फ्लोर पर लगे पहले दर्पण पर गिरेगी और तीन लेंस व दो अन्य मिरर से होते हुए सीधे ग्राउंड फ्लोर पर लगे आखिरी मिरर पर पड़ेगी। इससे रामलला की मूर्ति के मस्तक पर सूर्य किरणों का एक तिलक लग जाएगा। यह दो से तीन मिनट तक रामलला के माथे पर रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top