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राजधानी दिल्ली में सोमवार, 4 नवंबर की सुबह घने धुंध की चादर में लिपटी रही, और वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक, सुबह 9 बजे शहर का एक्यूआई स्तर 350 से ऊपर रहा। दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के चलते अस्पतालों में सांस की समस्या से जूझ रहे मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। प्रतिबंध के बावजूद दिवाली पर जमकर आतिशबाजी हुई, जिसे लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को फटकार लगाई है।

दिल्ली में आतिशबाजी पर कोर्ट सख्त, जवाब तलब
प्रदूषण के मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रतिबंध के बावजूद दिल्ली में पटाखे कैसे फोड़े गए, इसका जवाब दिल्ली सरकार दे। अदालत ने दिल्ली पुलिस से भी इस पर रोक के लिए ठोस मैकेनिज्म तैयार करने को कहा है ताकि अगले साल ऐसा न हो। दिल्ली पुलिस कमिश्नर को भी इस मामले में नोटिस जारी किया गया है।

पिछले दो सालों से ज्यादा प्रदूषण, बैन के बावजूद पटाखों से बढ़ा खतरा
अदालत ने बताया कि इस बार दिल्ली का प्रदूषण स्तर 2022 और 2023 से भी ज्यादा बढ़ा है। प्रदूषण पर काबू के लिए पहले ही आदेश दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद पटाखे फोड़े गए। अदालत ने फायर क्रैकर्स पर लगे प्रतिबंध को प्रदूषण नियंत्रण का एक अहम कदम बताया और दिल्ली सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है।

दिवाली के बाद लगातार बिगड़ रही वायु गुणवत्ता
सीपीसीबी के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में सोमवार सुबह एक्यूआई 373 दर्ज किया गया। दिल्ली के 39 निगरानी स्टेशनों में से 11 स्टेशनों पर एक्यूआई 400 से भी ऊपर था, जो गंभीर श्रेणी में आता है। दिवाली के बाद से राजधानी में प्रदूषण के स्तर में लगातार वृद्धि देखी जा रही है, जिसके कारण नागरिकों को सांस लेना भी दूभर हो गया है।

 

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