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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने मेधावी छात्रों को वित्तीय सहायता देने के लिए एक नई योजना, पीएम विद्यालक्ष्मी, को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों को उच्च शिक्षा से वंचित न होने देना है। अब कोई भी छात्र जो प्रमुख शिक्षा संस्थानों में प्रवेश लेना चाहता है, उसे लोन आसानी से मिल सकेगा।

कौन हैं इसके पात्र?
यह योजना देश के प्रतिष्ठित शिक्षा संस्थानों में प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए है। NIRF रैंकिंग के आधार पर 860 संस्थानों का चयन किया गया है, और हर साल यह संख्या बढ़ाई जाएगी। इस योजना से लगभग 22 लाख छात्रों को फायदा होने की उम्मीद है।

कैसे मिलेगा शिक्षा लोन?
छात्रों को अब बिना गारंटर और बिना कोलेटरल के लोन मिलेगा, जिससे ट्यूशन फीस और कोर्स से जुड़े खर्चों का प्रबंध किया जा सकेगा। पूरी लोन प्रक्रिया डिजिटल होगी, जिससे आवेदन करने में सरलता होगी।

ब्याज में छूट
जिन छात्रों की वार्षिक आय 8 लाख रुपये तक है, उन्हें 3% ब्याज सबवेंशन (ब्याज में छूट) मिलेगी। इसके साथ ही, 7.5 लाख रुपये तक के लोन पर 75% क्रेडिट गारंटी भी दी जाएगी, जिससे लोन प्राप्त करना और चुकाना आसान होगा।

लोन आवेदन कैसे होगा?
छात्र पीएम विद्यालक्ष्मी पोर्टल के माध्यम से लोन के लिए आवेदन कर सकेंगे। इस पोर्टल पर आवेदन प्रक्रिया आसान और पारदर्शी होगी। ई-वाउचर और CBDC वॉलेट के जरिए ब्याज सबवेंशन का भुगतान भी संभव होगा।

लाभ का अनुमान और भविष्य
सरकार ने इस योजना के लिए अगले 7 सालों में 3,600 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है, जिससे 7 लाख छात्रों को ब्याज में छूट का लाभ मिलेगा। यह योजना गरीब और मेधावी छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के रास्ते खोलने का एक बड़ा अवसर है।

उज्जवल भविष्य की ओर एक कदम
प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना शिक्षा के क्षेत्र में समावेशन बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सहायता करेगी, जिससे वे अपने सपनों को साकार कर सकेंगे।

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