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2014 के बाद प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में शुरू हुआ सनातन संस्कृति का स्वर्णिम काल – मुख्यमंत्री धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में जनसुनवाई कर लोगों की समस्याएं सुनीं।
राज्य के प्रत्येक विकासखंड में बालिकाओं के लिए एक-एक छात्रावास बनाया जाएगा- मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी नगाण गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में हुए सम्मिलित
सीएम घोषणाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को दिये निर्देश।
डोल आश्रम में मुख्यमंत्री ने श्री पीठम स्थापना महोत्सव में किया प्रतिभाग, 1100 कन्याओं का पूजन व माँ राजेश्वरी का अभिषेक
मुख्य सचिव ने चारधाम यात्रा मार्गों की तैयारियों की समीक्षा की
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी में वरिष्ठ नागरिक सम्मान एवं खेल समारोह में किया प्रतिभाग
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘प्रखर छात्रवृत्ति योजना 2025’ के तहत मेधावी विद्यार्थियों को किया सम्मानित

नई दिल्ली। भारत के लिए एक राहत की खबर सामने आई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सामने रूसी सेना में भर्ती हुए भारतीयों का मुद्दा उठाने के बाद रूस ने भारतीय नागरिकों को छुट्टी देने और उनकी वापसी की सुविधा देने का फैसला किया है.

जब से रूस-यूक्रेन युद्ध छिड़ा है, भारत रूसी सेना में कार्यरत अपने नागरिकों की सुरक्षा और स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने के लिए रूस पर दबाव डाल रहा है और युद्ध क्षेत्र में भारतीयों के बारे में जानकारी मिलने पर तत्काल कार्रवाई की है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 200 भारतीय नागरिकों को रूसी सेना में सुरक्षा सहायक के तौर पर भर्ती किया गया था.

उम्मीद की जा रही थी कि भारत रूस-यूक्रेन संघर्ष में दो लोगों की मौत के बाद भर्ती हुए भारतीयों के मुद्दे को जोरदार ढंग से उठाएगा और उनकी शीघ्र रिहाई की मांग करेगा. भारतीय नागरिकों को रूसी सेना में शामिल होने के लिए धोखा दिया गया. गौरतलब है कि जून में विदेश मंत्रालय ने कहा था कि रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष में रूसी सेना में भर्ती हुए दो भारतीय नागरिक मारे गए थे. भारत ने रूसी सेना में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों की शीघ्र रिहाई और वापसी का मामला उठाया है.

एस जयशंकर ने कहा था, ‘कई भारतीयों को रूसी सेना की सेवाओं में लगाया गया है, जब वे वापस आएंगे तभी हमें पूरी परिस्थितियों का पता चलेगा. लेकिन, जो भी परिस्थितियां हैं, हमारे लिए यह अस्वीकार्य है कि भारतीय नागरिक खुद को किसी अन्य देश की सेना में पाते हैं.’

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