Headline
वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम को लेकर राज्य स्तरीय अनुमोदन समिति की बैठक, मुख्य सचिव ने दिए अहम निर्देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया ‘मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना’ का शुभारंभ
हिमालय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ‘हिमालयो नाम नगाधिराजः’ कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री
श्रमिक अपने पसीने से प्रदेश के विकास की नई इबारत लिख रहे हैं : महाराज
महाराज ने मौके पर ही किया जन समस्याओं का निस्तारण, श्रम विभाग द्वारा आयोजित श्रमिक पंजीकरण एवं नवीनीकरण शिविर में किया प्रतिभाग
डीएम ने ईवीएम-वीवीपैट की सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा, निर्धारित प्रोटोकॉल के पालन के निर्देश
देहरादून में गूंजा गोर्खाली संस्कृति का रंग, सीएम धामी बोले- सरकारी स्तर पर और भव्य होगा हरितालिका तीज उत्सव
सीएम धामी ने ‘NeST Fest-2026’ में किया प्रतिभाग, पूर्वोत्तर के युवाओं का किया स्वागत
बिना मान्यता संचालित मदरसों पर धामी सरकार की कार्रवाई जारी, देहरादून-हल्द्वानी में कई मदरसे सील

हरिद्वार। अगर आप हरिद्वार में रहते हैं या गंगा जल का उपयोग पीने के लिए करते हैं, तो अब सतर्क हो जाइए। उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, हरिद्वार में गंगा नदी का पानी अब ‘B’ श्रेणी में पाया गया है, जो पीने के लिए असुरक्षित है। हालांकि, इस पानी से नहाने में कोई खतरा नहीं है।

बोर्ड हर महीने हरिद्वार के आसपास उत्तर प्रदेश की सीमा पर लगभग आठ स्थानों से गंगा के पानी के नमूने लेकर जांच करता है।

गंगा जल ‘B’ श्रेणी में पाया गया
नवंबर माह की जांच के दौरान गंगा का पानी ‘B’ कैटगरी में आया, जो यह दर्शाता है कि पानी को कीटाणुरहित करने के बाद भी पीने के लिए सुरक्षित नहीं माना जा सकता। पानी को गुणवत्ता के आधार पर पांच श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इनमें ‘A’ श्रेणी सबसे साफ और पीने योग्य होती है, जबकि ‘E’ सबसे अधिक प्रदूषित मानी जाती है।

क्या बोले अधिकारी?
उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी राजेंद्र सिंह ने बताया कि पानी की गुणवत्ता चार मापदंडों – पीएच, घुलित ऑक्सीजन, जैविक ऑक्सीजन और कुल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया – के आधार पर जांची जाती है। हरिद्वार का गंगा जल नहाने के लिए उपयुक्त है, लेकिन पीने के लिए नहीं।

पुजारी ने जताई चिंता
स्थानीय पुजारी उज्ज्वल पंडित ने गंगा जल में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गंगा की शुद्धता मानव मल के कारण प्रभावित हो रही है। उन्होंने यह भी कहा, “गंगा जल से नहाने से शरीर की बीमारियां दूर होती हैं। लेकिन वर्तमान प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक है, जिसे सुधारने की आवश्यकता है।”

नदियों में बढ़ता प्रदूषण चिंता का विषय
गंगा ही नहीं, देश की अन्य नदियां भी प्रदूषण से प्रभावित हो रही हैं। 1 दिसंबर को दिल्ली की यमुना नदी में जहरीले झाग की मोटी परत देखी गई, जिससे स्वास्थ्य पर संभावित खतरों को लेकर चिंता और बढ़ गई।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top