प्रदेश में 29 हजार से अधिक नई MSME इकाइयां स्थापित, 1.27 लाख युवाओं को मिला प्रत्यक्ष रोजगार; 26 विभागों की 206 से अधिक सेवाएं सिंगल विंडो पोर्टल पर ऑनलाइन
हल्द्वानी: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को हल्द्वानी स्थित आईटीसी फॉर्च्यून में कुमाऊं मंडल के व्यापारियों, उद्योग प्रतिनिधियों एवं विभिन्न व्यापार मंडलों के पदाधिकारियों के साथ संवाद किया। मुख्यमंत्री ने व्यापारियों की समस्याओं, सुझावों और अपेक्षाओं को सुना तथा उनके समाधान के लिए प्रभावी कार्रवाई और हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
संवाद के दौरान व्यापारियों एवं उद्योग प्रतिनिधियों ने ( GST ) जीएसटी प्रक्रियाओं के सरलीकरण, मंडी शुल्क, अतिक्रमण और पार्किंग, लीज नवीनीकरण, औद्योगिक क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं, स्थानीय उत्पादों के लिए बेहतर बाजार तथा युवा उद्यमियों को प्रोत्साहन जैसे मुद्दे मुख्यमंत्री के सामने रखे।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि व्यापारी और उद्योग प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। छोटे दुकानदार से लेकर बड़े उद्यमी तक प्रदेश की विकास यात्रा के महत्वपूर्ण भागीदार हैं। सरकार व्यापारियों एवं उद्यमियों के लिए सुरक्षित, पारदर्शी और सरल व्यावसायिक वातावरण तैयार करने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
उन्होंने कोविड काल को याद करते हुए कहा कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी किराना एवं रिटेल व्यापारियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों तक राशन और आवश्यक वस्तुएं पहुंचाईं। संकट के समय व्यापारी वर्ग ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई और देश-प्रदेश के मजबूत स्तंभ के रूप में अपनी भूमिका साबित की।

29 हजार से अधिक नई MSME इकाइयां
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड में 29 हजार से अधिक नई MSME इकाइयां स्थापित हुई हैं, जिनसे लगभग 1.27 लाख युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। सरकार की सोच है कि शासन उद्योगों के लिए बाधा नहीं, बल्कि सहयोगी और भागीदार बने। उद्योगों के विस्तार से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था और मजबूत होगी।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में Ease of Doing Business को सरल और प्रभावी बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। निवेशकों और उद्यमियों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए “निवेश मित्र” की व्यवस्था की गई है। वहीं 26 प्रमुख विभागों की 206 से अधिक सेवाएं सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन उपलब्ध हैं।

200 करोड़ रुपये का वेंचर फंड
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाने के उद्देश्य से उत्तराखंड स्टार्टअप नीति लागू की गई है। इसके साथ ही 200 करोड़ रुपये का वेंचर फंड भी स्थापित किया गया है। सरकार का प्रयास है कि पर्वतीय क्षेत्रों के युवा अपने गांव में रहकर भी देश और दुनिया के बाजार के लिए कारोबार खड़ा कर सकें।
औद्योगिक विकास को पर्वतीय क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा में छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने हेतु विशेष औद्योगिक पार्कों के लिए भूमि चिन्हित की गई है। वहीं हरिद्वार में आधुनिक सुविधाओं वाली फ्लैटेड फैक्ट्री विकसित की जा रही है। भविष्य में सेलाकुई और पंतनगर में भी ऐसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
“मेड इन उत्तराखंड” को वैश्विक पहचान दिलाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि “वन डिस्ट्रिक्ट, टू प्रोडक्ट” जैसी पहलों के जरिए स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक शिल्प को बड़े बाजारों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार चाहती है कि “मेड इन उत्तराखंड” गुणवत्ता और विश्वास के साथ वैश्विक बाजार में एक मजबूत ब्रांड बने।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में फार्मा, हर्बल, आयुष, इंजीनियरिंग और ऑटो-कंपोनेंट जैसे क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों के रूप में विकसित हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता प्रत्येक व्यापारी को सुरक्षित वातावरण, पारदर्शी व्यवस्था, सरल प्रक्रियाएं और बेहतर निवेश अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने व्यापारियों एवं उद्योग प्रतिनिधियों से प्रदेश में निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को और आगे बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा—
“आप व्यापार बढ़ाइए, सरकार आपके साथ खड़ी है।”
उन्होंने कहा कि व्यापार एवं उद्योग जगत के सहयोग और सहभागिता से विकसित उत्तराखंड का संकल्प साकार होगा और राज्य विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
