Headline
डोईवाला क्षेत्र में हुई चोरी की घटना का दून पुलिस ने किया खुलासा, मामा- भांजा ही निकले आरोपी
खेत बचाओ अभियान को जनांदोलन बनाने का आह्वान, किसानों ने लिया मिट्टी और कृषि संरक्षण का संकल्प
ACC विंग के 73 कैडेट्स ने पूरी की ट्रेनिंग, चेतवुड हॉल में हुआ भव्य दीक्षांत समारोह
नोएडा में ऑनलाइन बेटिंग ठगी गिरोह का भंडाफोड़, 2.4 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने विश्व पर्यावरण दिवस पर किया पौधारोपण
सूबे के स्कूलों में अनिवार्य होगा एनसीसी, एनएसएस व स्काउट- डाॅ. धन सिंह रावत
‘‘सरलीकरण, समाधान, निस्तारण एवं संतुष्टि’’ के मंत्र को धरातल पर उतारे विभाग- डीएम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने की शिष्टाचार भेंट
मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने जिलाधिकारियों के साथ वीडियोकॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा कर महत्त्वपूर्ण दिशा निर्देश दिए।

चार भारतीय कंपनियां भी शामिल 

अवैध शिपिंग नेटवर्क को बाधित करने के लिए लिया गया फैसला 

वॉशिंगटन। अमेरिका ने  पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उद्योग से जुड़ी कई कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं। जिन कंपनियों पर अमेरिका की ओर से यह प्रतिबंध लगाए गए हैं। उन सभी का जुड़ाव ईरान के तेल उद्योग से है। प्रतिबंधित की गई इन कंपनियों में कुछ भारतीय कंपनियां भी शामिल हैं। अमेरिका की ओर से यह कदम ईरान पर दवाब बनाने के लिए लगाए हैं। अमेरिका ने ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उद्योग से कथित जुड़ाव के लिए 16 कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया जिनमें से चार भारतीय कंपनियां भी शामिल हैं। अमेरिकी वित्त विभाग द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, प्रतिबंधित भारतीय कंपनियां ऑस्टिनशिप मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड, बीएसएम मरीन एलएलपी, कॉसमॉस लाइन्स इंक और फ्लक्स मैरीटाइम एलएलपी हैं।

बयान में कहा गया कि अमेरिकी विदेश विभाग ने ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उद्योग से जुड़ाव के लिए 16 कंपनियों को चिह्नित किया है और उनके खिलाफ प्रतिबंध लगाया जा रहा है। विदेश विभाग ने, वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) के साथ मिलकर, 22 व्यक्तियों पर भी प्रतिबंध लगाए तथा ईरान के तेल उद्योग से उनके जुड़ाव के कारण विभिन्न क्षेत्रों में उनके 13 जहाजों को प्रतिबंधित संपत्ति के रूप में चिह्नित किया है।

अमेरिका की ओर से यह फैसला अवैध शिपिंग नेटवर्क को बाधित करने के लिए उठाया गया है। जो एशिया में खरीदारों को ईरानी तेल बेचने के लिए काम करता है। यह नेटवर्क सैकड़ों मिलियन डॉलर के कच्चे तेल के कई बैरल को अवैध शिपिंग के जरिए बेचने की कोशिश कर रहा था। अमेरिका का मानना है कि, तेल राजस्व के जरिए ईरान के आतंकवाद को आर्थिक रूप से मदद दे रहा है। उसके इस कदम से ईरान की आर्थिक गतिविधियों पर नकेल कसेगा और आतंकवाद वित्तपोषण को रोक पाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top