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कोलकाता: बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर भारत, ब्रिटेन समेत कई देशों ने चिंता व्यक्त की है। सोशल मीडिया पर जारी वीडियो और रिपोर्ट्स में हिंदू समुदाय पर भेदभाव, उत्पीड़न, हत्या और नौकरी से जबरन इस्तीफा दिलवाने के मामलों को उजागर किया गया है।

इस स्थिति पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ा रुख अपनाते हुए संयुक्त राष्ट्र (UN) से बांग्लादेश में शांति सेना तैनात करने का आह्वान किया है। साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से व्यक्तिगत रूप से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।

ममता बनर्जी की अपील
सीएम ममता ने कहा, “बांग्लादेश में हमारे परिवार, संपत्तियां और प्रियजन हैं। हम धार्मिक आधार पर हो रहे अत्याचारों की निंदा करते हैं और प्रधानमंत्री मोदी से अपील करते हैं कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें।”

उन्होंने इस्कॉन कोलकाता इकाई के प्रमुख से बात कर इस स्थिति पर अपनी सहानुभूति व्यक्त की। ममता ने यह भी कहा कि भारत सरकार को इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र के समक्ष उठाना चाहिए और हिंसा प्रभावित बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

बांग्लादेश में हालात और अंतरिम सरकार
अगस्त में बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद छोड़ना पड़ा और उन्होंने भारत में शरण ली।
सेना ने अंतरिम सरकार स्थापित होने तक सत्ता संभाली।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस्कॉन से जुड़े कम से कम तीन हिंदू पुजारी देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किए गए हैं।
आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं, पर समर्थन जरूरी
बंगाल विधानसभा में सोमवार को ममता बनर्जी ने कहा,
“हम बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने की कोशिश नहीं कर रहे हैं, लेकिन जब भारतीय मूल के लोगों पर हमले हो रहे हैं, तो हम चुप नहीं बैठ सकते। यदि जरूरत पड़ी, तो हम अपने लोगों को वापस ला सकते हैं।”

उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने हमेशा बांग्लादेशी मछुआरों और ट्रॉलर पलटने के मामलों में मदद की है।

भारत सरकार से आग्रह
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से मांग की है कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उठाना चाहिए ताकि धार्मिक आधार पर हो रहे अत्याचारों को रोका जा सके।

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