World – One India Times https://oneindiatimes.com National News Portal Sat, 13 Sep 2025 18:02:05 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.4 https://oneindiatimes.com/wp-content/uploads/2022/12/fav.png World – One India Times https://oneindiatimes.com 32 32 नेपाल की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री बनीं सुशीला कार्की, भ्रष्टाचार विरोधी छवि से बनाई पहचान https://oneindiatimes.com/sushila-karki-became-the-first-female-interim-prime-minister-of-nepal-made-her-mark-with-her-anti-corruption-image/ https://oneindiatimes.com/sushila-karki-became-the-first-female-interim-prime-minister-of-nepal-made-her-mark-with-her-anti-corruption-image/#respond Sat, 13 Sep 2025 18:02:05 +0000 https://oneindiatimes.com/?p=42175

काठमांडू। नेपाल में पहली बार किसी महिला ने अंतरिम प्रधानमंत्री पद संभाला है। पूर्व सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस सुशीला कार्की को शुक्रवार रात राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शपथ दिलाई। जन-जेनरेशन (Gen-Z) प्रदर्शनकारियों के समर्थन से सत्ता में आईं सुशीला कार्की को देश में एक ईमानदार और सख्त छवि वाली नेता माना जाता है। इसके साथ ही वे नेपाल के 220 सालों के इतिहास में इस पद तक पहुंचने वाली पहली महिला बन गईं हैं।

नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस रही कार्की

कार्की पहले भी इतिहास रच चुकी हैं। 2016 में वे नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस बनी थीं। अपने कार्यकाल में उन्होंने कई अहम फैसले दिए, जिनमें सरोगेसी को बिजनेस बनने से रोकना शामिल है। उनके नेतृत्व वाली बेंच ने कहा था कि किराए की कोख गरीब महिलाओं का शोषण कर रही है, जिसके बाद नेपाल में सरोगेसी टूरिज्म पर रोक लगी।

2017 में कार्की के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव 

2017 में उस समय की प्रचंड सरकार ने उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया था। आरोप लगाया गया कि वे राजनीतिक दबाव को नज़रअंदाज़ कर फैसले देती हैं। लेकिन कार्की के समर्थन में हजारों लोग काठमांडू की सड़कों पर उतर आए और सुप्रीम कोर्ट ने भी उनके पक्ष में आदेश दिया। नतीजा यह हुआ कि संसद को प्रस्ताव वापस लेना पड़ा।

कार्की का निजी जीवन भी रहा सुर्खिया में 

कार्की का निजी जीवन भी सुर्खियों में रहा। उनके पति दुर्गा प्रसाद सुबेदी कभी क्रांतिकारी आंदोलनों में सक्रिय रहे और 1973 में उन्होंने साथियों के साथ एक विमान हाइजैक किया था। यह घटना नेपाल के इतिहास की पहली हाइजैकिंग थी। हालांकि, कार्की ने पति के विवादित अतीत से दूरी रखते हुए अपनी पहचान मेहनत और ईमानदारी से बनाई।

कार्की का भारत से जुड़ाव गहरा 

सुशीला कार्की का भारत से भी गहरा जुड़ाव है। उन्होंने वाराणसी के बीएचयू से पढ़ाई की और अक्सर कहा कि गंगा किनारे बिताए दिन उनकी जिंदगी की सबसे यादगार यादें हैं। बिराटनगर की रहने वाली कार्की भारत-नेपाल सीमा से बेहद नज़दीक पली-बढ़ी और हिंदी भी समझती हैं।

भारत-नेपाल रिश्ते पर रुख सकारात्मक

भारत-नेपाल रिश्तों पर वे हमेशा सकारात्मक रुख रखती हैं। उनका कहना है कि दोनों देशों की जनता भावनात्मक रूप से जुड़ी है और छोटे-मोटे मतभेद रिश्तों की मजबूती को प्रभावित नहीं कर सकते।

देश की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री के तौर पर अब कार्की पर राजनीतिक स्थिरता और भ्रष्टाचार विरोधी उम्मीदों का बोझ है। आम लोगों को विश्वास है कि वे अपने सख्त और निष्पक्ष फैसलों  से नेपाल की राजनीति को नई दिशा देंगी।

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प्रधानमंत्री मोदी को श्रीलंका की सरकार ने ‘मित्र विभूषण सम्मान’ से किया सम्मानित  https://oneindiatimes.com/prime-minister-modi-honored-with-mitra-vibhushan-samman-by-the-government-of-sri-lanka/ https://oneindiatimes.com/prime-minister-modi-honored-with-mitra-vibhushan-samman-by-the-government-of-sri-lanka/#respond Sat, 05 Apr 2025 10:24:59 +0000 https://indiatimesgroup.com/?p=41325

भारत और श्रीलंका ऐसे पड़ोसी हैं जिनके बीच गहरे ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध हैं – राष्ट्रपति अनुरा कुमारा

कोलंबो/नई दिल्ली। श्रीलंका की सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘श्रीलंका मित्र विभूषण सम्मान’ से सम्मानित किया है। श्रीलंका की सरकार यह सम्मान उन देशों के राष्ट्राध्यक्षों को देती है, जिनके श्रीलंका के साथ अच्छे संबंध होते हैं। भारत के ऐतिहासिक तौर पर श्रीलंका के साथ अच्छे संबंध रहे हैं। साथ ही जब श्रीलंका आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा था तो उस वक्त भी सबसे पहले भारत ने ही श्रीलंका के लिए मदद का हाथ बढ़ाया था। अब इन अच्छे संबंधों को ही मान्यता देते हुए श्रीलंका की सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान दिया है। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने प्रधानमंत्री मोदी को ‘मित्र विभूषण सम्मान’ का मेडल पहनाकर सम्मानत किया। सम्मान पाने के बाद पीएम मोदी ने कहा कि यह भारत के 140 करोड़ देशवासियों का सम्मान है।

श्रीलंका मित्र विभूषण सम्मान में एक चांदी का मेडल होता है, जिसमें बना धर्म चक्र बौद्ध विरासत का प्रतीक है। इस बौद्ध विरासत ने भारत और श्रीलंका की सांस्कृतिक परंपराओं को आकार दिया है। मेडल में बना पुन कलश (एक औपचारिक बर्तन) समृद्धि और नवीनीकरण का प्रतीक है। मेडल में बने नवरत्न दोनों देशों के बीच अमूल्य और स्थायी दोस्ती का प्रतिनिधित्व करते हैं। सूर्य और चंद्रमा प्राचीन अतीत से अनंत भविष्य तक फैले बंधन को दर्शाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मानित होने के बाद कहा कि ‘श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके द्वारा श्रीलंका मित्र विभूषण पुरस्कार से सम्मानित होना मेरे लिए नहीं बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के लिए सम्मान की बात है। यह श्रीलंका और भारत के लोगों के बीच ऐतिहासिक संबंध और गहरी मित्रता को दर्शाता है और इसके लिए मैं राष्ट्रपति, श्रीलंका सरकार और यहां के लोगों को धन्यवाद देता हूं।’

श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने कहा कि ‘भारत और श्रीलंका के बीच बहुत गहरी दोस्ती है। हम ऐसे पड़ोसी हैं जिनके बीच गहरे ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध हैं और ये संबंध लंबे समय से चले आ रहे हैं। हमारे संबंध साझा मूल्यों, आपसी सम्मान और समान हितों पर आधारित हैं।’ पीएम मोदी ने कहा कि ‘भारत और श्रीलंका के बीच सदियों पुराने आध्यात्मिक और आत्मीयता भरे संबंध हैं। मुझे यह बताते हुए खुशी है कि 1960 में गुजरात के अरावली में मिले भगवान बुद्ध के अवशेष को श्रीलंका में दर्शन के लिए भेजा जा रहा है। त्रिंकोमाली के थिरुकोनेश्वरम मंदिर के जीर्णोद्धार में भारत सहयोग देगा। हमने मछुआरों की आजीविका से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। हम सहमत हैं कि हमें इस मामले में एक मानवीय सहायता के साथ आगे बढ़ना चाहिए। हमने मछुआरों को तुरंत रिहा किये जाने और उनकी नौकाओं को वापस भेजने पर भी बल दिया। भारत और श्रीलंका का संबंध आपसी विश्वास और सद्भावना पर आधारित है।’

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म्यांमार के दूसरे सबसे बड़े शहर के पास आया 5.1 तीव्रता का भूकंप  https://oneindiatimes.com/5-1-magnitude-earthquake-strikes-near-myanmars-second-largest-city/ https://oneindiatimes.com/5-1-magnitude-earthquake-strikes-near-myanmars-second-largest-city/#respond Sun, 30 Mar 2025 09:38:51 +0000 https://indiatimesgroup.com/?p=40872

अब तक 1,700 लोगों के मारे जाने की खबर 

थाईलैंड में भूकंप के कारण 47 अब भी लापता

नाएप्यीडॉ। म्यांमार शुक्रवार को आए शक्तिशाली भूकंप के बाद लगातार धरती कांप रही है। यूएसजीएस के मुताबिक, रविवार को म्यांमार के दूसरे सबसे बड़े शहर के पास 5.1 तीव्रता का भूकंप आया। हालांकि, नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी ने इसकी तीव्रता 4.6 बताई। यह शुक्रवार के विनाशकारी भूकंप के बाद आए झटकों में सबसे नया था। भूकंप के झटके महसूस होने पर मांडले की सड़कों पर लोग चीखने लगे। इससे पहले शुक्रवार को शहर के पास 7.7 तीव्रता का भूकंप आया था, जिससे कई इमारतें गिर गईं और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा। अब तक 1,700 लोगों के मारे जाने और 3,400 से अधिक लोगों के लापता होने की खबर है।

आशंका जताई जा रही है कि यह संख्या बढ़ सकती है। रविवार दोपहर आए झटके से पहले 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद म्यांमार में शनिवार शाम तक कम से कम पांच झटके महसूस किए गए थे। इसमें सबसे तेज झटका 6.4 तीव्रता का था। लगातार आ रहे झटकों से लोगों में दहशत है। म्यांमार सागाइंग फॉल्ट पर स्थित है, जो इंडिया प्लेट और सुंडा प्लेट को अलग करता है, जिस वजह से यहां भूकंप का खतरा बना रहता है।

इससे पहले शुक्रवार को आए भूकंप के चलते कई इमारतें ढहने से व्यापक क्षति हुई है। म्यांमार लंबे समय से चल रहे गृहयुद्ध की चपेट में है और वहां पहले से ही एक बड़ा मानवीय संकट बना हुआ है। ऐसे में राहत-बचाव कार्यों में  काफी मुश्किल हो रही है। म्यांमार के पड़ोसी देश थाईलैंड में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे और इसने राजधानी बैंकॉक समेत देश के अन्य क्षेत्रों को हिलाकर रख दिया था। हालात यह हैं कि अस्पतालों में जगह कम पड़ गई है और सड़कों पर अस्थाई तरीके से मरीजों का इलाज किया जा रहा है। इलाज सामग्री व दवाओं की भी काफी कमी हो गई है।

बैंकॉक के अधिकारियों ने बताया कि थाईलैंड में भूकंप के कारण अब तक 10 लोग मृत पाए गए हैं, 26 लोग घायल हैं और 47 अब भी लापता हैं। राजधानी के लोकप्रिय चतुचक बाजार के निकट एक निर्माण स्थल पर काफी तबाही हुई है। भूकंप आने पर, थाईलैंड की सरकार के लिए एक चीनी कंपनी द्वारा बनाई जा रही 33 मंजिला ऊंची इमारत हिली और धूल के गुबार के साथ धराशायी हो गई।

]]> https://oneindiatimes.com/5-1-magnitude-earthquake-strikes-near-myanmars-second-largest-city/feed/ 0 म्यांमार में आए भूकंप से 1002 से अधिक लोगों की मौत, सैंकड़ों लापता https://oneindiatimes.com/more-than-1002-people-died-and-hundreds-are-missing-due-to-earthquake-in-myanmar/ https://oneindiatimes.com/more-than-1002-people-died-and-hundreds-are-missing-due-to-earthquake-in-myanmar/#respond Sat, 29 Mar 2025 05:53:30 +0000 https://indiatimesgroup.com/?p=40784

भूकंप में 2300 से अधिक लोग घायल 

थाईलैंड में भी भूंकप से 10 लोगों की मौत 

म्यांमार की मदद के लिए भारत ने ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत भेजी राहत सामग्री 

नेपीडॉ। म्यांमार में भूकंप में 1002 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। सैंकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं। वहीं इस भूकंप में अभी तक 2300 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। 30 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। राहत-बचाव कार्य तेजी से चल रहा है। उधर थाईलैंड में करीब 10 लोगों की भूंकप से मौत हुई है। अचानक आई इस आपदा के बाद म्यांमार ने आपातकाल लगा दिया गया है। इस भंयकर भूकंप का असर सिर्फ म्यांमार पर ही नहीं बल्कि आसपास के देशों में देखने को मिला है। भूकंप का भारत, चीन नेपाल समेत पांच देशों में देखने को मिला है। भूकंप से प्रभावित म्यांमार की मदद के लिए भारत ने ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत राहत सामग्री भेजी है। वायुसेना का विमान सी-130 जे करीब 15 टन राहत सामग्री लेकर यांगून पहुंच गया है।

म्यांमार के अलावा थाईलैंड, चीन, नेपाल और भारत में भूकंप के झटके महसूस किए गए। वहीं शनिवार रात में भी म्यांमार और अफगानिस्तान में फिर से भूकंप के झटके महसूस किए गए। सुबह करीब 5 बजकर 16 मिनट पर अफगानिस्तान में भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता 4.7 रही।  समाचार एजेंसी एएफपी ने म्यांमार की सेना (जुंटा) के हवाले से बताया है कि भूकंप में अबतक 694 लोगों की  मौत हुई है, जबकि 1,670 घायल हुए हैं।

वहीं अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण(यूएसजीएस) का अनुमान है कि मरने वालों की संख्या 1,000 से अधिक हो सकती है। अस्पतालों में खून की भारी किल्लत की खबरें मिल रही हैं। म्यांमार में राहत और बचाव कार्य तेजी से जारी हैं, लेकिन हर तरफ मलबे का ढेर, टूटी सड़कें, और ढही इमारतें नजर आ रही है। बताया जा रहा है कि, अस्पतालों में घायलों की तादाद भी हजारों में है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण  के अनुसार, इस भूकंप से मरने वालों की संख्या 1,000 से अधिक हो सकती है। वहीं सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल न्यू लाइट ऑफ म्यांमार के अनुसार, पांच शहरों और कई कस्बों में इमारतें गिर गई हैं, और दो प्रमुख पुल भी ढह चुके हैं।

इस विनाशकारी भूकंप ने मंडाले, नेपिटॉ, यांगून और कई अन्य शहरों में इमारतों, पुलों और सड़कों को भारी नुकसान पहुंचाया है। लेकिन सबसे अधिक मौतें नेपिटॉ में हुई हैं। यहां से 90 से अधिक लोगों की मौत का आंकड़ा सामने आया है। म्यांमार की सैन्य सरकार के प्रमुख, सीनियर जनरल मिन आंग हलाइंग ने टेलीविजन पर बताया कि देश में अब तक 144 लोगों की मौत हो चुकी है और यह आंकड़ा बढ़ सकता है। भूकंप का केंद्र म्यांमार के दूसरे सबसे बड़े शहर मंडाले के पास था। झटकों के बाद कई आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद के झटके) भी महसूस किए गए, जिनमें से एक की तीव्रता 6.4 मापी गई। मंडाले में भूकंप ने कई इमारतों को जमींदोज कर दिया, जिनमें शहर का एक प्रमुख मठ भी शामिल था। राजधानी नेपिटॉ में भी कई सरकारी कर्मचारियों के आवासीय भवन मलबे में तब्दील हो गए, जहां बचाव दल पीड़ितों को निकालने में जुटा हुआ है।

म्यांमार सरकार के अनुसार, सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में रक्तदान की अत्यधिक आवश्यकता है। अस्पतालों में खून की भारी कमी बताई जा रही है। आपदा में घायल लोगों से अस्पताल भरे पड़े हैं। म्यांमार ना इस आपदा में दवाओं और अन्य राहत सामाग्री की कमी से जूझ रहा है। सैन्य सरकार ने विदेशी सहायता स्वीकार करने की घोषणा की है, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने प्रारंभिक राहत कार्यों के लिए 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता राशि जारी की है। वहीं चीन और रूस ने म्यांमार में बचाव दल भेजे हैं, राष्ट्रपति ट्रंप ने भी अमेरिकी मदद की बात कही है।

एक ऑनलाइन वीडियो में देखा गया कि मंडाले की एक सड़क पर भिक्षु अपने मठ मा सोए याने की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे, तभी वह पूरी तरह धराशायी हो गया। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि इस दुर्घटना में कोई घायल हुआ या नहीं। क्रिश्चियन एड नामक संगठन ने बताया कि भूकंप से एक बांध भी टूट गया, जिससे शहर के निचले इलाकों में पानी भर गया है।

थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में भी इस भूकंप का प्रभाव महसूस किया गया। यहां एक 33 मंजिला निर्माणाधीन इमारत पूरी तरह गिर गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत गिरते ही पूरे इलाके में धूल का गुबार छा गया, लोग घबराकर चीखने लगे और सड़कों पर अफरा-तफरी मच गई। बैंकॉक प्रशासन के अनुसार, इस दुर्घटना में अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, 16 घायल हैं और 101 लोग लापता हैं। थाईलैंड सरकार ने इसे “भयानक त्रासदी” करार दिया और कहा कि अभी भी कुछ लोगों के जीवित होने की उम्मीद है।

चीनी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भूकंप चीन के युन्नान और सिचुआन प्रांतों में महसूस किया गया। वहीं म्यांमार की सीमा पर स्थित रुइली शहर में भूकंप से नुकसान और चोटें आईं। सामने आए एक वीडियो रुइली में सड़क पर इमारत का मलबा बिखरा हुआ दिख रहा है और एक व्यक्ति को स्ट्रेचर पर एम्बुलेंस की ओर ले जाया जा रहा था। रुइली से लगभग 100 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित चीनी शहर मंगशी में भूकंप के झटके इतने तेज थे कि लोग खड़े नहीं हो पा रहे थे।

भारत ने सहायता के तौर पर म्यांमार को 15 टन राहत सामग्री भेजी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक्स पर जानकारी साझा की है। ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत भारतीय वायुसेना (आईएएफ) सी-130जे विमान में सवार होकर म्यांमार को राहत सामग्री भेजी गई।  राहत पैकेज में टेंट, स्लीपिंग बैग, कंबल, खाने के लिए तैयार भोजन, वाटर प्यूरीफायर, हाइजीन किट, सोलर लैंप, जनरेटर सेट और पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स, सीरिंज, दस्ताने और पट्टियां जैसी आवश्यक जीचें शामिल हैं।

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दक्षिण कोरिया में आग से 16 लोगों की हुई मौत, आग बुझाने में लगे 9,000 अग्निशामक https://oneindiatimes.com/16-people-died-in-fire-in-south-korea-9000-firefighters-engaged-in-extinguishing-the-fire/ https://oneindiatimes.com/16-people-died-in-fire-in-south-korea-9000-firefighters-engaged-in-extinguishing-the-fire/#respond Wed, 26 Mar 2025 07:11:09 +0000 https://indiatimesgroup.com/?p=40579

जल गई 43,000 एकड़ से अधिक भूमि 

19 लोग हुए घायल 

1,300 साल पुराना बौद्ध मंदिर गौंसा भी आग से हुआ नष्ट

सियोल। दक्षिण कोरिया के दक्षिणी क्षेत्रों में शुष्क मौसम और तेज हवाओं के चलते लगी आग से अब तक कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई। सरकारी अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि आग से 19 लोग घायल हुए हैं। अंडोंग शहर और अन्य दक्षिण-पूर्वी कस्बों के अधिकारियों ने मंगलवार को लोगों को अपने घर छोड़ने का आदेश दिया, क्योंकि अग्निशामक दल शुष्क हवाओं के कारण कई क्षेत्रों में लगी आग को बुझाने की कोशिश कर रहे थे। आग से करीब 43,000 एकड़ से अधिक भूमि जल गई है। इसके अलावा, उइसोंग में 1,300 साल पुराना एक बौद्ध मंदिर गौंसा भी आग से नष्ट हो गया। हालांकि, इसमें किसी के घायल होने की तत्काल कोई सूचना नहीं है। मंदिर के कुछ राष्ट्रीय खजाने, जिसमें पत्थर की बुद्ध प्रतिमा भी शामिल है, को लकड़ी की इमारतों तक आग पहुंचने से पहले ही खाली करा लिया गया था।

दक्षिण कोरिया के आंतरिक और सुरक्षा मंत्रालय के अनुसार, अंडोंग, उइसोंग, सांचोंग और उल्सान शहरों में 5,500 से अधिक लोगों को अपने घरों से बाहर निकलने के लिए मजबूर होना पड़ा। दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने पहले कहा था कि अग्निशामकों ने सबसे बड़ी आग की लपटों को बुझा दिया है, लेकिन शुष्क मौसम ने उनकी कोशिशों में रुकावट डाली और आग फिर से फैल गई। आग बुझाने के लिए लगभग 9,000 अग्निशामक, 130 से अधिक हेलीकॉप्टर और सैकड़ों वाहन तैनात किए गए, लेकिन हवाओं के तेज होने से रात भर आग बुझाने के किए गए प्रयास आंशिक रूप से रुक गए, जिसके चलते एंडोंग और उइसोंग काउंटी के अधिकारियों ने कई गांवों और एंडोंग विश्वविद्यालय के आस-पास के निवासियों को सुरक्षित स्थानों या अस्थायी आश्रयों में जाने का आदेश दिया है।

इनमें स्कूल और इनडोर जिम भी शामिल हैं, क्योंकि उइसोंग में लगी आग तेज हवाओं के कारण फैलती रही।इसके अलावा, आग उइसोंग के पास के तटीय शहर योंगदेओक में भी फैल गई, जहां अधिकारियों ने सड़कें बंद कर दीं और कम से कम चार गांवों के निवासियों को घर खाली करने का आदेश दिया। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, उइसोंग के पास ही चेओंगसोंग काउंटी की एक जेल से लगभग 2,600 कैदियों को स्थानांतरित करना शुरू कर दिया है।कोरिया वन सेवा के अनुसार, बुधवार सुबह तक अग्निशमन कर्मी देश भर में कम से कम पांच सक्रिय जंगल की आग बुझाने में लगे थे। इसके अलावा, शनिवार को तेज हवाओं के कारण तेजी से फैली आग की लपटों में फंसने से सांचोंग में चार अग्निशमन कर्मियों और सरकारी कर्मचारियों की मौत हो गई।

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आखिर क्यों.. पेरू की एक महिला को संघीय आव्रजन अधिकारियों ने हनीमून से लौटने के बाद किया गिरफ्तार https://oneindiatimes.com/why-a-peruvian-woman-was-arrested-by-federal-immigration-officials-after-returning-from-her-honeymoon/ https://oneindiatimes.com/why-a-peruvian-woman-was-arrested-by-federal-immigration-officials-after-returning-from-her-honeymoon/#respond Mon, 24 Mar 2025 07:39:42 +0000 https://indiatimesgroup.com/?p=40453

अमेरिका। वीजा खत्म होने के बाद भी अमेरिका में रह रहीं पेरू की एक महिला को संघीय आव्रजन अधिकारियों ने हनीमून से लौटने के बाद गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद महिला के पति और ट्रंप समर्थक ने कहा कि उसे अपने वोट पर कोई पछतावा नहीं है। ट्रंप ने यह प्रणाली नहीं बनाई, लेकिन उनके पास इसे सुधारने का अवसर है।

विस्कॉन्सिन के रहने वाले ब्रैडली बार्टेल अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के समर्थक हैं। उन्होंने चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को वोट दिया था। उनकी पत्नी कैमिला मुनोज पेरू की नागरिक हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मुनोज 2019 में वर्क-स्टडी वीजा पर विस्कॉन्सिन डेल्स पहुंची थीं। इस दौरान कोरोना के चलते अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर रोक लगने के कारण उनका वीजा समाप्त हो गया था। उन्होंने खेती और रेसेप्शनिस्ट का काम किया। इस दौरान उनकी मुलाकात मिस्टर बार्टेल से हुई। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और कुछ समय बाद उन्होंने शादी कर ली। मगर कोरोना के चलते वे हनीमून पर नहीं जा सके।

फरवरी में वे हनीमून के लिए प्यूर्टो रिको गए। हनीमून से लौटने पर आव्रजन अधिकारियों ने बार्टेल की पत्नी मुनोज से उनकी नागरिकता के बारे में पूछा। जब उन्होंने बताया कि वह ग्रीन कार्ड प्राप्त करने के लिए प्रयास कर रही हैं तो उन्हें हिरासत में ले लिया गया। अब उन्हें लुइसियाना में एक ICE सुविधा में रखा गया है।

इसे लेकर मुनोज के पति बार्टेल ने दुख जताया। उन्होंने कहा कि यह एक बुरे सपने के जैसा था। हमारे पास वकील है। मगर सिस्टम बहुत अक्षम है, इसलिए इसमें जितना समय लगना चाहिए, उससे ज़्यादा समय लग रहा है। मुझे बहुत से नफरत भरे संदेश मिले हैं, बहुत से लोगों ने कहा है कि हम इसके लायक हैं।

बार्टेल ने आव्रजन की आलोचना करते हुए सुधार की मांग की है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि ICE के पास वास्तव में कोई जानकारी नहीं होती। विभागों के बीच बेहतर प्रक्रियाओं और संचार के लिए सिस्टम को नया रूप देने की आवश्यकता है। अगर मेरी पत्नी को निर्वासित किया जाता है तो मैं पेरू जाऊंगा। उन्होंने कहा कि यह मेरे दिमाग में आया है, लेकिन मेरे बेटे के लिए यह बहुत मुश्किल होगा।

राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद ही डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका से करीब 1.1 करोड़ अवैध अप्रवासियों को निर्वासित करने की बात कही थी। इसके बाद अमेरिकी सेना ने लैटिन अमेरिकी देशों में अवैध अप्रवासियों को लेकर छह उड़ानें भरी। ट्रंप ने  अप्रवासियों पर शिकंजा कसने के लिए सेना का भरपूर इस्तेमाल किया। सैन्य उड़ानें निर्वासितों को लेकर ग्वाटेमाला, होंडुरास, पनामा, इक्वाडोर, पेरू और भारत समेत कई देशों में लेकर गईं।

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अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को लेकर स्पेसएक्स का कैप्सूल धरती के लिए हुआ रवाना https://oneindiatimes.com/spacex-capsule-carrying-astronauts-sunita-williams-and-butch-wilmore-departed-for-earth/ https://oneindiatimes.com/spacex-capsule-carrying-astronauts-sunita-williams-and-butch-wilmore-departed-for-earth/#respond Tue, 18 Mar 2025 06:36:38 +0000 https://indiatimesgroup.com/?p=39997

17 घंटे का होगा अंतरिक्ष यात्रियों का सफर 

वॉशिंगटन। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में फंसे नासा के अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को लेकर स्पेसएक्स का कैप्सूल धरती के लिए रवाना हो गया है। सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर भारतीय समयानुसार बुधवार तड़के 3:27 बजे धरती पर लौटेंगे। सुनीत विलियम्स समेत तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री आज सुबह आईएसएस से अनडॉक हो गए। अंतरिक्ष यात्रियों का ये सफर 17 घंटे का होने वाला है। वे फ्लोरिडा के तट पर उतरेंगे। सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर ने पिछले साल 5 जून 2025 को  नासा के मिशन के तहत बोइंग के अंतरिक्ष यान पर बैठकर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए उड़ान भरी थी।

वे वहां सिर्फ एक सप्ताह रुकने वाले थे लेकिन अंतरिक्ष यान में तकनीकी खराबी आने की वजह से दोनों धरती पर वापस नहीं आ सके। दोनों के लिए 10 दिन का मिशन 9 महीने से अधिक के इंतजार में बदल गया। मिशन प्रबंधक 18 मार्च की शाम के लिए पूर्वानुमानित अनुकूल परिस्थितियों के आधार पर क्रू-9 की पहले वापसी के अवसर को लक्षित करने में जुट गए हैं। ड्रैगन क्राफ्ट पहले ही चार अंतरिक्ष यात्रियों को छोड़कर सुनीता और बुच को लेने आईएसएस पर पहुंच चुका है। इस बीच, सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर ने उनके स्थान पर पहुंचे चारों नए अंतरिक्ष यात्रियों को मिशन से संबंधित जानकारियां साझा कीं और कई प्रमुख बातें सिखाईं।

दोनों यात्री नौ माह पूर्व एक सप्ताह के लिए आईएसएस गए थे लेकिन उनका स्टारलाइनर यान खराब हो गया और वे वहीं फंसकर रह गए। अब उनकी वापसी के लिए स्पेसएक्स ड्रैगन का इस्तेमाल किया जा रहा है। नासा के अंतरिक्ष यात्री निक हेग और रोस्कोस्मोस कॉस्मोनॉट अलेक्जेंडर गोर्बुनोव भी ड्रैगन कैप्सूल में वापस आएंगे। नासा से जुड़े स्टीव स्टिच ने कहा कि बुच और सुनीता ने शानदार काम किया है और हम उन्हें वापस लाने के लिए उत्साहित हैं।

नासा के सेवानिवृत्त अंतरिक्ष यात्री कैडी कोलमैन ने बताया है कि अंतरिक्ष यात्रियों के लिए कोई विशेष ओवरटाइम वेतन नहीं है। ऐसे में अंतरिक्ष यात्री संघीय कर्मचारी हैं, और इस स्थिति में अंतरिक्ष में उनके समय को पृथ्वी पर किसी भी नियमित कार्य यात्रा की तरह ही माना जाता है। अंतरिक्ष यात्री अपना नियमित वेतन पाते रहते हैं। नासा उनके भोजन व आईएसएस पर रहने के खर्च उठाता है। उन्हें प्रतिदिन 4 डॉलर (347 रुपये) दैनिक भत्ता मिलता है। सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को अतिरिक्त मुआवजे के रूप में 1,148 डॉलर (लगभग 1 लाख रुपये) मिलने की संभावना है। हालांकि कोलमैन ने इसे सिर्फ एक अनुमान बताया।

नासा अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर ने स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रति आभार व्यक्त किया है। मस्क द्वारा एक्स पर पोस्ट एक वीडियो में सुनीता ने कहा, हम जल्द ही वापस आ रहे हैं, इसलिए मेरे बिना वे योजनाएं न बनाएं। हम जल्द ही वापस आ जाएंगे। बुच विलमोर ने कहा, हम सभी मस्क के प्रति अत्यंत सम्मान रखते हैं और जाहिर तौर पर हमारे राष्ट्रपति ट्रंप के प्रति भी सम्मान और प्रशंसा रखते हुए हम उनकी सराहना करते हैं।

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अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स को लाने के लिए अमेरिकी अंतरिक्ष यान आज हुआ रवाना  https://oneindiatimes.com/the-us-spacecraft-departed-today-to-bring-astronaut-sunita-williams/ https://oneindiatimes.com/the-us-spacecraft-departed-today-to-bring-astronaut-sunita-williams/#respond Sat, 15 Mar 2025 10:02:00 +0000 https://indiatimesgroup.com/?p=39794

भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स के धरती पर सुरक्षित वापस लौटने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। उनके साथ बैरी विल्मोर भी धरती पर नौ महीने बाद लौटेंगे। दोनों को लाने के लिए अमेरिकी अंतरिक्ष यान आज तड़के (भारतीय समयानुसार) रवाना हो गया है। माना जा रहा है कि आज ही देर शाम तक यह अंतरिक्ष यान आईएसएस पर डॉक कर सकता है। इसके बाद सुनीता और बैरी दोनों पृथ्वी पर जल्द से जल्द लौट सकते हैं।

पहले जानें- सुनीता विलियम्स को किस मिशन में भेजा गया था?

5 जून 2024 को नासा का बोइंग क्रू फ्लाइट टेस्ट मिशन लॉन्च किया गया था। इस मिशन के तहत नासा ने अपने दो अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बैरी बुच विल्मोर को आठ दिन की यात्रा पर भेजा। दोनों को स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान के जरिए मिशन पर भेजा गया था। यह अंतरिक्ष यात्रियों के साथ अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के लिए स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान की पहली उड़ान थी।

जिस मिशन पर सुनीता और बैरी हैं वो नासा के व्यावसायिक क्रू कार्यक्रम का हिस्सा है। दरअसल, नासा का लक्ष्य है कि वह अमेरिका के निजी उद्योग के साथ साझेदारी में अमेरिका से अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक सुरक्षित, विश्वसनीय और कम लागत के मानव मिशन भेजे। इसी उद्देश्य से यह टेस्ट मिशन लॉन्च किया गया था। इस मिशन का लक्ष्य अंतरिक्ष स्टेशन पर छह महीने के रोटेशनल मिशन (बारी-बारी से मिशन) को अंजाम देने की स्टारलाइनर की क्षमता को दिखाना था। लंबी अवधि की उड़ानों से पहले तैयारी को परखने और जरूरी परफॉर्मेंस डेटा जुटाने के लिए क्रू उड़ान परीक्षण को बनाया गया था।

किस वजह से आईएसएस पर ही फंस गईं सुनीता और बैरी?
हालांकि, अंतरिक्ष स्टेशन के लिए स्टारलाइनर की उड़ान के दौरान, अंतरिक्ष यान के कुछ थ्रस्टर्स ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं किया। थ्रस्टर्स’ आमतौर पर कम फोर्स वाले रॉकेट मोटर्स को कहा जाता है। थ्रस्टर्स के कमजोर प्रदर्शन के अलावा स्टारलाइनर के हीलियम सिस्टम में कई लीक भी देखे गए। इसके बाद नासा और बोइंग ने अंतरिक्ष यान के बारे में व्यापक डेटा विश्लेषण के जरिए जानकारी जुटाई। इस जांच में अंतरिक्ष शटल कोलंबिया दुर्घटना के बाद स्थापित हुए संगठन शामिल थे। यह दुर्घटना 1 फरवरी, 2003 को हुई थी। यह दुर्घटना तब हुई थी जब कोलंबिया अंतरिक्ष यान पृथ्वी के वातावरण में वापस आ रहा था। इस दुर्घटना में सभी सात अंतरिक्ष यात्री मारे गए थे जिसमें भारतीय मूल की कल्पना चावला भी शामिल थीं।

सुनीता-बैरी को लौटाने के लिए क्या-क्या किया गया?

1. नासा ने इसके बाद बोइंग के स्टारलाइनर को वापस पृथ्वी पर लौटाने की संभावनाओं को तलाशा। जांच के बाद यह सामने आया कि स्टारलाइनर में यात्रियों को वापस लाना सुरक्षित नहीं होगा। आखिरकार तीन महीने के इंतजार के बाद नासा ने फैसला किया कि स्टारलाइनर को बिना क्रू के ही वापस धरती पर लाया जाएगा। 6 सितंबर 2024 को स्टारलाइनर बिना क्रू के ही धरती पर लौट आया।

2. इस बीच नासा ने सुनीता और बैरी को वापस लाने के लिए नई योजना पर काम शुरू कर दिया था। बताया जाता है कि स्टारलाइनर के आईएसएस में अटके होने की वजह से अगस्त में आईएसएस भेजा जाने वाला स्पेसएक्स का क्रू-9 मिशन सितंबर तक अटक गया था। ऐसे में नासा ने स्पेसएक्स की तरफ से तय किए गए चार अंतरिक्ष यात्रियों में से सिर्फ दो को ही सितंबर के अंत में भेजने का फैसला किया, ताकि इसकी वापसी में सुनीता और बैरी को खाली पड़े स्लॉट में जगह देकर पृथ्वी पर लौटाया जा सके। क्रू-9 को आखिरकार 28 सितंबर को लॉन्च कर दिया गया।

3. क्रू-9 मिशन की वापसी 17 दिसंबर को तय की गई थी। यानी सुनीता और बैरी को दो महीने से ज्यादा समय और आईएसएस पर ही बिताना था। लेकिन इस अवधि को भी लगातार बढ़ाया गया। दरअसल, नासा ने फैसला किया कि क्रू-9 को पृथ्वी पर लौटाने से पहले वह स्पेसएक्स के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट को एक नए क्रू-10 मिशन के लिए लॉन्च कर देना चाहता है। लेकिन क्रू-10 की लॉन्चिंग की तैयारियां दिसंबर में पूरी नहीं हो पाईं। नासा ने बताया कि ड्रैगन अंतरिक्ष यान जनवरी की शुरुआत में फ्लोरिडा पहुंचेगा। इसके बाद क्रू-10 की लॉन्चिंग को फरवरी तक के लिए टाल दिया गया।  

4. फरवरी में वापसी तय होने के बाद जहां क्रू-9 के दोनों सदस्यों- अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री निक हेग और रूसी अंतरिक्ष यात्री अलेक्सांद्र गोरबुनोव को फ्लाइट से जुड़े कई परीक्षण करने थे, तो वहीं सुनीता विलियम्स इस दौरान आईएसएस के एक्सपीडिशन 72 की कमांडर बन गईं। उनके अनुभव के मद्देनजर स्पेस स्टेशन पर रहने वाले हर व्यक्ति के कामकाज और देखरेख की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। पांच महीने के दौरान अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव भी हुए, जिनमें आईएसएस पर मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों ने भी वोट डाले।

5. इस बीच नासा ने आईएसएस में मौजूद सुनीता और बैरी को लौटाने की प्रक्रिया को तेज करने की कोशिश की। हालांकि, 12 फरवरी को एक बार फिर टीम की तैयारियों को झटका लगा। दरअसल, एजेंसी को ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट की तैयारियों की प्रक्रिया के प्रमाणन में समय लग रहा था। ऐसे में इसकी लॉन्चिंग को एक महीने के लिए टाल दिया गया और क्रू-10 को 12 मार्च को आईएसएस के लिए लॉन्च करने की तैयारी हुई।

6. 12 मार्च को नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च होने से करीब एक घंटे पहले क्रू-10 मिशन को एक बार फिर टाल दिया गया। बताया गया कि स्पेसएक्स के फैल्कन 9 रॉकेट में ग्राउंड सपोर्ट क्लैंप आर्म के साथ हाइड्रॉलिक सिस्टम समस्या के कारण लॉन्चिंग को रद्द कर दिया गया है। इसके बाद लॉन्च की अगली तारीख 13 मार्च को शाम 7.26 बजे (भारतीय समय के अनुसार 14 मार्च सुबह 4:56 बजे) तय की गई। क्रू-10 का यह मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च भी हो गया।

7. अब क्रू-10 की सफल लॉन्चिंग के साथ ही नासा ने एलान किया है कि अंतरिक्ष यात्री निक हेग, सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर के साथ रूसी अंतरिक्ष यात्री अलेक्सांद्र गोरबुनोव का क्रू-9 मिशन हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी करने के बाद बुधवार 19 मार्च को सुबह 9:05 बजे से पहले अंतरिक्ष स्टेशन से प्रस्थान कर सकते हैं। बशर्ते कि फ्लोरिडा के तट से दूर स्पलैशडाउन स्थानों पर मौसम खराब हो।

पृथ्वी पर लौटने के बाद सुनीता-बैरी को क्या दिक्कतें आ सकती हैं?

1. फ्लू जैसी स्थिति, चलने में दिक्कतें
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सुनीता विलियम्स और बैरी विलमोर की वापसी बिल्कुल भी आसान नहीं होने वाली है। पृथ्वी पर आईएसएस के मुकाबले माहौल काफी अलग है। दरअसल, अंतरिक्ष का माहौल जीरो ग्रैविटी वाला होता है। यानी यहां अंतरिक्ष यात्री एक कदम में कई फीट की दूरी पूरी कर लेते हैं। इतना ही नहीं कई मौकों पर तो उन्हें स्पेसशिप पर घंटों पैर भी नहीं रखना पड़ता। ऐसे में ठोस सतहों पर उनके पैरों की दबाव डालने की क्षमता कम हो जाती है और उनके पैरों में मौजूद मांसपेशियों का मोटा हिस्सा कम होता है।

इसके चलते पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण बल की मौजूदगी की वजह से अब जब वे चलने की कोशिश करेंगे तो उन्हें ठोस सतह पर पैर बढ़ाने में भी दिक्कतें आएंगी और कमजोरी महसूस होगी। साथ ही उन्हें अपने कदम छोटे-छोटे लगेंगे, जिसे ‘बेबी फीट’ कंडीशन कहा जाता है। इतना ही नहीं सुनीता और बैरी को पृथ्वी पर कुछ समय के लिए चक्कर आने और जी मिचलाने की शिकायत भी होगी।

एक अंतरिक्ष यात्री टेरी विर्ट्स के मुताबिक, आईएसएस के जीरो ग्रैविटी माहौल से लौटने के बाद उन्हें अपना वजन काफी भारी लग रहा था। इतना ही नहीं उन्हें चक्कर भी आ रहे थे और उन्हें फ्लू जैसा संक्रमण महसूस हो रहा था। टेरी के मुताबिक, अंतरिक्ष से लौटने के बाद शरीर को पृथ्वी के माहौल में ढलने के लिए कम से कम एक हफ्ता लगता है। माना जा रहा है कि सुनीता और बैरी के लिए पूरी तरह पृथ्वी के माहौल में ढलने के लिए यह समय कुछ ज्यादा भी हो सकता है।

2. कमजोर दिल
द गार्डियन अखबार के मुताबिक, अंतरिक्ष में रहने के दौरान एस्ट्रोनॉट्स की हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है, जो कि जल्दी ठीक नहीं होता। इसके अलावा उनके शरीर में मांस भी कम होता है। इससे हाथ-पैर कमजोर होते हैं। यहां तक कि दिल पर भी इसका असर होता है, क्योंकि जहां पृथ्वी पर हृदय को खून का प्रवाह बनाए रखने के लिए गुरुत्वाकर्षण के उलट भी काम करना होता है, वहीं अंतरिक्ष में जीरो ग्रैविटी में हृदय पर यह अतिरिक्त बल नहीं पड़ता।चूंकि सुनीता विलियम्स लंबे समय तक अंतरिक्ष में रही हैं, इसलिए उनका दिल फिलहाल जीरो ग्रैविटी में काम करने का आदि हो गया है। उसे खून को शरीर के हर अंग में पहुंचाने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। अब जब वे पृथ्वी पर लौटेंगी तो उनके दिल को गुरुत्वाकर्षण बल के खिलाफ भी खून का प्रवाह बनाना होगा। यानी उनके कमजोर दिल को फिर से पृथ्वी के हिसाब से मजबूती दिखानी होगी। इसमें कई बार काफी समय लगता है और शरीर के हर अंग तक खून का प्रवाह समय पर बन नहीं पाता। इससे अंतरिक्ष यात्रियों के शरीर में खून का थक्का जमने (ब्लड क्लॉटिंग) का खतरा बढ़ जाता है।

3. दिमाग पर असर
इतना ही नहीं जीरो ग्रैविटी वाले माहौल से पृथ्वी पर आने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों के शरीर में मौजूद फ्लुइड दिमाग के आसपास इकट्ठा होने लगता है। इसके चलते उन्हें फ्लू का अहसास होता है। एस्ट्रोफिजिसिस्ट एलन डफी के मुताबिक, इस फ्लुइड की वजह से अंतरिक्षयात्रियों की आंखों की पुतली का आकार बदल जाता है और उन्हें देखने में दिक्कतें आती हैं। पृथ्वी पर लौटने के बाद एस्ट्रोनॉट्स को कई बार चश्मे की जरूरत भी पड़ती है।
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जो देश हमारे साथ जैसा करेगा, हम भी उसके साथ वैसा ही करेंगे – डोनाल्ड ट्रंप  https://oneindiatimes.com/whatever-a-country-does-to-us-we-will-do-the-same-to-it-donald-trump/ https://oneindiatimes.com/whatever-a-country-does-to-us-we-will-do-the-same-to-it-donald-trump/#respond Mon, 10 Mar 2025 11:54:54 +0000 https://indiatimesgroup.com/?p=39554

कनाडा और मेक्सिको पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का किया एलान 

कनाडा ने भी अमेरिका से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर के उत्पादों पर टैरिफ लगाने का किया फैसला 

वॉशिंगटन। सीईओ के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि समय के साथ कनाडा और मेक्सिको पर भविष्य में टैरिफ बढ़ सकते हैं। ट्रंप ने ये भी कहा कि वैश्विक समुदाय ने अमेरिका से लंबे समय तक फायदा उठाया। उन्होंने आगे कहा कि अब व्यापार जगत टैरिफ को लेकर आई स्पष्टता को देख सकता है। कई वर्षों तक विश्व भर के देशों ने अमेरिका का फायदा उठाया। उन्होंने अमेरिका से पैसा लिया और अब हम इसे वापस ला रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि जो देश हमारे साथ जैसा करेगा, हम भी उसके साथ वैसा ही करेंगे।

गौरतलब है कि ट्रंप ने कनाडा और मेक्सिको पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का एलान किया है। ट्रंप ने दोनों देशों पर यह टैरिफ अवैध अप्रवासन पर लगाम न लगाने के लिए और अमेरिका में फेंटानिल ड्रग की आवक के लिए लगाया है। ट्रंप का मानना है कि कनाडा और मेक्सिको के जरिए ही अमेरिका में फेंटानिल ड्रग की तस्करी होती है, जिससे अमेरिका में लाखों लोग मर चुके हैं। साथ ही ट्रंप का मानना है कि कनाडा और मेक्सिको अगर अवैध अप्रवासियों पर नकेल कसते तो अमेरिका में इतने बड़े पैमाने पर अवैध अप्रवासी नहीं आ सकते थे। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति ने हाल ही में 30 दिनों के लिए मेक्सिको और कनाडा से आने वाले कुछ उत्पादों पर टैरिफ लगाने का फैसला टाल दिया है।

ट्रंप के एलान के बाद से कनाडा और मेक्सिको में चिंता का माहौल है। अमेरिका के जवाब में कनाडा ने भी अमेरिका से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर के उत्पादों पर टैरिफ लगाने का फैसला किया है। मेक्सिको ने भी अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी है। यही वजह है कि ट्रंप के फैसले से वहां के शेयर बाजार में गिरावट देखी जा रही है। दरअसल कनाडा और मेक्सिको में लोग अमेरिकी उत्पादों का बहिष्कार कर रहे हैं। साथ ही पारस्परिक टैरिफ लगने से इन देशों में अमेरिकी उत्पाद काफी महंगे हो गए हैं। हालांकि ट्रंप पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे हैं और उन्होंने 2 अप्रैल से जैसे को तैसा की तर्ज पर सभी देशों पर टैरिफ लगाने का एलान कर दिया है।

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पूर्व सीएम के बेटे को जिंदा होते हुए किया गया मृत घोषित, अदालत में की झूठी रिपोर्ट पेश  https://oneindiatimes.com/former-cms-son-was-declared-dead-while-he-was-alive-false-report-presented-in-the-court/ https://oneindiatimes.com/former-cms-son-was-declared-dead-while-he-was-alive-false-report-presented-in-the-court/#respond Sun, 09 Mar 2025 09:55:01 +0000 https://indiatimesgroup.com/?p=39460

पाकिस्तान। एक हैरान करने वाले घटनाक्रम के तहत पूर्व सीएम के बेटे को जिंदा होते हुए भी मृत घोषित कर दिया गया है। पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, सिंध के पूर्व सीएम कायम अली शाह के बेटे लियाकत अली शाह को जीवित होने के बावजूद आधिकारिक दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया गया है। पाकिस्तान के स्वास्थ्य सचिव, डीजी स्वास्थ्य और अतिरिक्त स्वास्थ्य सचिव सहित विभाग के अधिकारियों ने लियाकत अली शाह की मृत्यु का दावा करते हुए अदालत में एक झूठी रिपोर्ट पेश की।

घर में मृत पाया गया पुलिसकर्मी
लियाकत अली शाह खैरपुर के सरकारी नेत्र अस्पताल में प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं। उन पर जिला स्वास्थ्य अधिकारी के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान 161 से अधिक कर्मचारियों को अवैध रूप से नियुक्ति देने का आरोप है। 10 फरवरी कराची में लियाकत अली शाह के आवास पर एक पुलिसकर्मी मृत पाया गया। पुलिस ने बताया कि पुलिसकर्मी दरखशान पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले एक घर से मृत पाया गया और प्रारंभिक जांच के बाद पता चला कि यह घर पीपीपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सैयद कायम अली शाह के बेटे का था। हालांकि ये पता नहीं चल पाया कि पुलिसकर्मी की मौत के बाद आधिकारिक दस्तावेज में लियाकत अली शाह का नाम कैसे दर्ज हुआ।

लियाकत अली शाह ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने पुलिसकर्मी को यह जगह किराए पर दी थी और उन्हें उसकी मौत की वजह के बारे में नहीं पता है। बाद में, एएसपी दरखशान पुलिस स्टेशन राणा दिलावर ने कहा कि पुलिसकर्मी की मौत स्वाभाविक लग रही है क्योंकि यह पता चला है कि उसकी मौत दौरे पड़ने के बाद हुई।

(साभार)

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