Health – One India Times https://oneindiatimes.com National News Portal Sun, 11 Jan 2026 18:05:42 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://oneindiatimes.com/wp-content/uploads/2022/12/fav.png Health – One India Times https://oneindiatimes.com 32 32 पैक्ड जूस और एनर्जी ड्रिंक बन रहे ‘मीठा जहर’, वैज्ञानिकों ने जारी किया अलर्ट https://oneindiatimes.com/packaged-juices-and-energy-drinks-are-becoming-sweet-poison-scientists-issue-alert/ https://oneindiatimes.com/packaged-juices-and-energy-drinks-are-becoming-sweet-poison-scientists-issue-alert/#respond Sun, 11 Jan 2026 18:04:56 +0000 https://oneindiatimes.com/?p=42884

आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में खान-पान की आदतें स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बनती जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कई गंभीर बीमारियों की जड़ हमारी रोज़मर्रा की डाइट में छिपी है। खास तौर पर मीठे पेय पदार्थ—जैसे सॉफ्ट ड्रिंक्स, पैकेट बंद जूस, फ्लेवर्ड मिल्क और एनर्जी ड्रिंक्स—सेहत पर चुपचाप लेकिन गहरा असर डाल रहे हैं।

टीवी और डिजिटल विज्ञापनों में इन ड्रिंक्स को ताकत, फुर्ती और स्टैमिना बढ़ाने वाला बताया जाता है। वर्कआउट के बाद थकान दूर करने या खेल के दौरान ऊर्जा पाने के लिए युवा वर्ग इन्हें तेजी से अपना रहा है। लेकिन डॉक्टरों की चेतावनी है कि यही आदत भविष्य में गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती है, खासकर लिवर से जुड़ी समस्याओं की।

वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि इन पेय पदार्थों में अत्यधिक मात्रा में मिलाई गई शुगर होती है, जिसमें फ्रक्टोज प्रमुख है। फ्रक्टोज का मेटाबॉलिज्म सीधे लिवर में होता है। जब शरीर को जरूरत से ज्यादा फ्रक्टोज मिलता है, तो लिवर इसे फैट में बदलकर जमा करने लगता है। लंबे समय तक ऐसा होने से फैटी लिवर डिज़ीज़ का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल्स में प्रकाशित अध्ययनों के अनुसार, जो लोग रोज़ाना मीठे पेय का सेवन करते हैं, उनमें फैटी लिवर की आशंका सामान्य लोगों की तुलना में कहीं अधिक पाई गई है। यह बीमारी आगे चलकर स्टीटोहेपेटाइटिस जैसे गंभीर लिवर रोग में बदल सकती है, जिसमें लिवर की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अधिक शुगर वाली डाइट शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस और सूजन को बढ़ाती है। समय के साथ यह सूजन लिवर में स्थायी घाव (स्कार टिश्यू) बना सकती है, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।

लिवर ही नहीं, मीठे पेय शरीर के अन्य हिस्सों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। शोध के मुताबिक, नियमित रूप से कोल्ड ड्रिंक या शुगर ड्रिंक्स पीने से पेट की चर्बी, मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और हृदय रोगों का जोखिम बढ़ जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि प्यास बुझाने के लिए पानी, नारियल पानी या बिना शक्कर वाले प्राकृतिक पेय को प्राथमिकता दी जाए। छोटी-सी यह सावधानी भविष्य में बड़ी बीमारियों से बचा सकती है।

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श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के डाॅक्टरों के नाम एक और बड़ी उपलब्धि https://oneindiatimes.com/another-major-achievement-for-the-doctors-of-shri-mahant-indiresh-hospital/ https://oneindiatimes.com/another-major-achievement-for-the-doctors-of-shri-mahant-indiresh-hospital/#respond Mon, 22 Dec 2025 12:56:30 +0000 https://oneindiatimes.com/?p=42803

उत्तराखंड में अब तक के सबसे बड़े बोन ट्यूमरों में से एक बड़े बोन ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाला गया

वरिष्ठ कैंसर सर्जन डाॅ अजीत तिवारी के अथक प्रयासों से मरीज का पैर बचाया गया

श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के माननीय चेयरमैन श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने कैंसर सर्जरी विभाग के डाॅक्टरों को दी बधाई

देहरादून। उत्तराखंड में कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि दर्ज हुई है। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल, देहरादून के चिकित्सकों ने हड्डी के कैंसर (ऑस्टियोसारकोमा) से पीड़ित एक मरीज का अब तक के सबसे बड़े बोन ट्यूमरों में से एक बड़े बोन ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकालते हुए मरीज़ का पैर बचाने में सफलता प्राप्त की है। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के चेयरमैन श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने कैंसर सर्जरी विभाग के डाॅक्टरों की टीम को बधाई एवम् शुभकामनाएं दीं।

श्री महंत इन्दिरेश के वरिष्ठ कैंसर सर्जन डाॅ अजीत तिवारी ने जानकारी दी कि एक मरीज को ऑस्टियोसारकोमा नामक गम्भीर ह्डडी का कैंसर था। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में विस्तृत जांच और बहुविषयक (मल्टीडिसिप्लिनरी) चर्चा के बाद चिकित्सकों ने लिंब-सेल्वेज सर्जरी करने का निर्णय लिया। ट्यूमर का आकार बहुत बड़ा होने के कारण पैर काटने (अम्प्यूटेशन) की संभावना काफी अधिक थी, जिससे यह सर्जरी अत्यंत चुनौतीपूर्ण बन गई।

इससे पहले उन्होंने कई बड़े कैंसर अस्पतालों में परामर्श लिया, जहां उन्हें बताया गया कि बीमारी अत्यधिक फैल चुकी है और सर्जरी संभव नहीं है, इसलिए केवल कीमोथेरेपी ही विकल्प है। सर्जरी से पहले मरीज को डॉ. रचित आहूजा एवं डॉ. देबंजन (रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट) की देखरेख में नियोएडजुवेंट कीमोथेरेपी दी गई, जिससे बीमारी को नियंत्रित करने में सहायता मिली।

इसके पश्चात लिंब-प्रिजर्विंग कैंसर सर्जरी की सहायता से ट्यूमर को पूरी तरह निकालते हुए पैर को सुरक्षित रखा गया। यह जटिल सर्जरी डॉ. अजीत कुमार तिवारी (सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट), डॉ. शिफा (हड्डी रोग विशेषज्ञ) एवं डॉ. निशिथ गोविल (ऑन्को एनेस्थीटिस्ट) द्वारा सफलतापूर्वक संपन्न की गई। सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति लगातार बेहतर हो रही है। सभी टांके हटाए जा चुके हैं और मरीज अब बिना सहारे चलने लगा है।

अस्पताल प्रशासन ने बताया कि इस तरह की जटिल सर्जरी उत्तराखंड में उन्नत कैंसर उपचार की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है। चिकित्सकों ने इस उपलब्धि के लिए परम पूज्य श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज, चेयरमैन श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल, के निरंतर मार्गदर्शन, आशीर्वाद एवं सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। यह मामला उत्तराखंड में लिंब-प्रिजर्विंग बोन कैंसर सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है और गंभीर बोन कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए आशा की नई किरण है।

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पित्ताशय में पथरी क्यों बनती है? जानें वे आदतें जो खतरा बढ़ा देती हैं https://oneindiatimes.com/what-causes-gallstones-learn-about-habits-that-increase-your-risk/ https://oneindiatimes.com/what-causes-gallstones-learn-about-habits-that-increase-your-risk/#respond Sun, 16 Nov 2025 18:13:52 +0000 https://oneindiatimes.com/?p=42615

Reason Behind Stone in Gallbladder: लिवर के नीचे मौजूद छोटा अंग पित्ताशय (Gallbladder) शरीर में वसा को पचाने के लिए आवश्यक पित्त को सुरक्षित रखता है। लेकिन जब पित्त में मौजूद तत्व—जैसे कोलेस्ट्रॉल या बिलीरुबिन—अपने सामान्य अनुपात से बिगड़ जाते हैं, तो ये जमकर छोटे–बड़े कठोर कणों में बदल जाते हैं, जिन्हें गॉलस्टोन कहा जाता है। यह समस्या कई बार बिना किसी लक्षण के बनी रहती है और तभी सामने आती है जब पथरी नलिकाओं में फंसकर तेज दर्द उत्पन्न करती है।

आधुनिक जीवनशैली और गलत खान–पान इस समस्या को तेजी से बढ़ा रहे हैं। समय रहते इन कारणों को समझना जरूरी है ताकि आगे चलकर सर्जरी जैसे बड़े उपचार की जरूरत न पड़े।

कौन-सी गलत आदतें बढ़ाती हैं पित्ताशय की पथरी का खतरा?

1. अत्यधिक फैट वाला भोजन

अगर भोजन में वसा की मात्रा अधिक और फाइबर कम है, तो पित्त में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने लगता है। यही अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे पथरी बनाने लगता है।

2. तेजी से वजन कम करना

बहुत सख्त डाइट, लंबा उपवास या अचानक वजन कम करना पित्त में कोलेस्ट्रॉल बढ़ा देता है और पित्ताशय सही ढंग से खाली नहीं होता। इससे गॉलस्टोन बनने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

3. हार्मोन से जुड़ी दवाएं

एस्ट्रोजन वाली दवाएं—जैसे कुछ गर्भनिरोधक गोलियां या हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी—पित्त में कोलेस्ट्रॉल स्तर बढ़ा देती हैं। गर्भावस्था के दौरान भी हार्मोनल बदलाव यह जोखिम बढ़ा सकते हैं।

4. शारीरिक गतिविधि की कमी

लंबे समय तक बैठे रहना या व्यायाम न करना पित्ताशय को पूरी तरह खाली नहीं होने देता। इससे पित्त गाढ़ा हो जाता है और पथरी बनने की स्थिति पैदा होती है।

5. मोटापा

अधिक वजन होने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ता है, जो सीधे-सीधे गॉलस्टोन बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है।

कैसे बचा जा सकता है इस समस्या से?

संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, नियंत्रित वजन और विशेषज्ञ की सलाह से दवाओं का सेवन पित्ताशय की पथरी के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है। जीवनशैली में छोटे-मोटे सुधार इस दर्दनाक बीमारी से बचाव में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

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सीएम धामी ने कहा—बच्चों के स्वास्थ्य से समझौता नहीं, संदिग्ध सिरप बिक्री पर कड़ी निगरानी। https://oneindiatimes.com/cm-dhami-said-no-compromise-with-the-health-of-children-strict-monitoring-on-the-sale-of-suspicious-syrups/ https://oneindiatimes.com/cm-dhami-said-no-compromise-with-the-health-of-children-strict-monitoring-on-the-sale-of-suspicious-syrups/#respond Sun, 12 Oct 2025 16:14:56 +0000 https://oneindiatimes.com/?p=42416

  • मुख्यमंत्री धामी के सख्त निर्देश— बच्चों की सुरक्षा के लिए कफ सिरप बिक्री पर सख्त निगरानी, 350 से अधिक सैंपल लिए गए, दर्जनों मेडिकल स्टोर्स के लाइसेंस रद्द
  • हमारा लक्ष्य है कि उत्तराखंड में ऐसा कोई सिरप न बिके, जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बने- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के सख्त दिशा-निर्देशों पर उत्तराखंड में बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर औषधि विभाग ने बड़ा अभियान हुआ छेड़ा है। औषधि विभाग ने बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रदेश के सभी जिलों में छापेमारी का सिलसिला तेज कर दिया है। प्रदेशभर में कफ सिरप की गुणवत्ता और उसकी वैधानिकता की जांच के लिए मेडिकल स्टोर्स, होलसेल डिपो, फार्मा इंडस्ट्री और बच्चों के अस्पतालों पर औचक निरीक्षण लगातार जारी हैं। देहरादून, ऋषिकेश, हल्द्वानी, अल्मोड़ा और बागेश्वर सहित अन्य जिलों में औषधि निरीक्षकों की टीमों ने औचक निरीक्षण अभियान चलाया। अब तक 350 से अधिक सैंपल जांच के लिए लिए जा चुके हैं, जबकि एक दर्जन से अधिक मेडिकल स्टोर्स के लाइसेंस निरस्त किए जा चुके हैं। कई अन्य को कड़ी चेतावनी दी गई है। प्रदेश सरकार ने सभी बाल चिकित्सकों से अपील की है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को किसी भी स्थिति में प्रतिबंधित सिरप न लिखें। इस पूरे अभियान की मॉनिटरिंग स्वयं स्वास्थ्य सचिव एवं खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FDA) आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार कर रहे हैं, जो प्रतिदिन टीमों से फीडबैक लेकर कार्रवाई की प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं। अभियान का नेतृत्व अपर आयुक्त (एफडीए) ताजबर सिंह जग्गी कर रहे हैं, जिनके दिशा-निर्देशों में राज्यभर की औषधि निरीक्षक टीमें सक्रिय हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

देहरादून में औषधि विभाग की कार्रवाई
बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए औषधि विभाग ने शहरभर में औचक निरीक्षण अभियान चलाया। आयुक्त और अपर आयुक्त (एफडीए) के निर्देशों पर औषधि निरीक्षक मानेंद्र सिंह राणा के नेतृत्व में टीम ने पलटन बाजार, घंटाघर, ऋषिकेश रोड, जॉलीग्रांट, अजबपुर और नेहरू कॉलोनी क्षेत्रों में मेडिकल स्टोर्स और थोक विक्रेताओं की जांच की। निरीक्षण के दौरान बच्चों की सर्दी-खांसी की कुछ दवाएं अलग से भंडारित पाई गईं, जिन्हें मौके पर सील कर दिया गया और बिक्री पर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई। अधिकांश विक्रेताओं ने प्रतिबंधित सिरप की बिक्री पहले ही बंद कर दी थी, जबकि जहां स्टॉक मिला, उसे पेटियों में डालकर सील किया गया। कार्रवाई के दौरान एक मेडिकल स्टोर को बंद किया गया और 11 औषधियों के नमूने जांच के लिए लिए गए। टीम ने बताया कि SYP. Coldrif, SYP. Respifresh-TR और SYP. Relife जैसी दवाएँ स्टोर्स पर नहीं मिलीं। औषधि निरीक्षकों विनोद जागुड़ी और निधि रतूड़ी की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई को आगे भी जारी रखा जाएगा।

ऋषिकेश में बड़ी कार्रवाई, कफ सिरप भंडारण पर रोक
औषधि निरीक्षक निधि रतूड़ी ने ऋषिकेश क्षेत्र में स्थित राजकीय एसपीएस चिकित्सालय देहरादून रोड और जॉलीग्रांट के आसपास मेडिकल स्टोर्स का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कुछ स्टोर्स में बच्चों की सर्दी-खांसी की दवाइयाँ (सिरप) अलग से भंडारित थीं। टीम ने मौके पर ही इन दवाओं को सील कर दिया और स्पष्ट निर्देश दिए कि अगली आदेश तक इनकी बिक्री प्रतिबंधित रहेगी। औषधि निरीक्षक के अनुसार अधिकांश मेडिकल स्टोर्स ने शासन के आदेशों का पालन करते हुए प्रतिबंधित सिरप की बिक्री पहले ही रोक दी है। निरीक्षण के दौरान कुल 06 औषधियों के नमूने गुणवत्ता जांच हेतु संकलित किए गए।

हल्द्वानी में सात मेडिकल स्टोर्स की जांच
हल्द्वानी मुखानी क्षेत्र में औषधि विभाग की टीम ने सात मेडिकल स्टोर्स का निरीक्षण किया। इस दौरान दो कफ सिरप के नमूने जांच के लिए लिए गए। टीम ने सभी विक्रेताओं को शासन-प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए।

अल्मोड़ा और बागेश्वर में भी हुई जांच
अल्मोड़ा जिले में औषधि विभाग की टीम ने औचक निरीक्षण के दौरान एक मेडिकल स्टोर से कफ सिरप का एक नमूना परीक्षण के लिए लिया। वहीं, बागेश्वर जिले के गरुर क्षेत्र में दो मेडिकल स्टोर्स पर जांच की गई, जहाँ से दो बाल चिकित्सा सिरप के नमूने गुणवत्ता परीक्षण हेतु संकलित किए गए।

मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश “बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि”
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि उत्तराखंड सरकार बच्चों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि प्रत्येक मेडिकल स्टोर, अस्पताल और फार्मा यूनिट की जांच सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा हमारा लक्ष्य है कि उत्तराखंड में ऐसा कोई सिरप न बिके, जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बने। यह सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा है।

स्वास्थ्य मंत्री की अपील, डॉक्टर जिम्मेदारी निभाएं
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने प्रदेश के सभी डॉक्टरों से अपील की है कि वे बच्चों के लिए दवा लिखते समय विशेष सतर्कता बरतें। उन्होंने कहा कि दो वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी स्थिति में प्रतिबंधित सिरप न दी जाए। डॉक्टर और फार्मासिस्ट दोनों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों की सेहत को सर्वोपरि रखें।

स्वास्थ्य सचिव की सख्त चेतावनी
स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त (FDA) डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि बच्चों की सेहत से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अभियान के तहत हर जिले की टीम से प्रतिदिन रिपोर्ट ली जा रही है, और जहाँ लापरवाही पाई जाएगी, वहाँ लाइसेंस निरस्तीकरण सहित कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि यह अभियान न केवल मेडिकल स्टोर्स और होलसेल दवा डिपो तक सीमित है, बल्कि फार्मा कंपनियों और बाल चिकित्सालयों तक भी विस्तारित किया गया है।

चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा अभियान
अपर आयुक्त (एफडीए) ताजबर सिंह जग्गी ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा। राज्यभर में बच्चों के लिए असुरक्षित दवाओं की बिक्री और भंडारण पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। अपर आयुक्त (एफडीए)  ने कहा है कि सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट है राज्य के नागरिकों, विशेषकर बच्चों को केवल सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण औषधियां ही मिलें।

उत्तराखंड में औषधि विभाग की यह कार्रवाई राज्य सरकार के उस सुरक्षित स्वास्थ्य मिशन का हिस्सा है, जिसके तहत बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित दवाइयाँ उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने साफ किया है यह अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक प्रदेश से असुरक्षित औषधियों का पूर्ण उन्मूलन नहीं हो जाता।

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संदिग्ध कफ सिरप पर धामी सरकार का बड़ा एक्शन, कई स्टोरों के लाइसेंस रद्द। https://oneindiatimes.com/dhami-government-takes-major-action-against-suspicious-cough-syrup-cancels-licenses-of-many-stores/ https://oneindiatimes.com/dhami-government-takes-major-action-against-suspicious-cough-syrup-cancels-licenses-of-many-stores/#respond Thu, 09 Oct 2025 16:39:23 +0000 https://oneindiatimes.com/?p=42389

देहरादून :

  • धामी सरकार का सख्त कदम, बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रदेशभर में कफ सिरप पर बड़ी कार्रवाई, 170 नमूने जांच को भेजे, देहरादून में 7 मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस निरस्त, संदिग्ध सिरप जब्त और नमूने सील
  • राज्य सरकार बच्चों की सुरक्षा और जन स्वास्थ्य के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है- पुष्कर सिंह धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्यभर में अवैध, असुरक्षित और निम्न गुणवत्ता वाली कफ सिरप दवाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की टीमें प्रदेश के हर जिले में सक्रिय हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में शुरू यह अभियान अब तक की सबसे व्यापक कार्रवाई के रूप में सामने आया है। स्वास्थ्य सचिव व आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार और अपर आयुक्त व ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी की देखरेख में पूरे प्रदेश में दवा विक्रेताओं, थोक आपूर्तिकर्ताओं और मेडिकल स्टोरों पर औचक निरीक्षण चल रहा है।

देहरादून में सबसे बड़ी छापेमारी


आज एफडीए की टीम ने देहरादून में बड़े पैमाने पर छापेमारी की। आयुक्त, खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन के निर्देश पर औषधि निरीक्षक मानेंद्र सिंह राणा के नेतृत्व में टीम ने चकराता रोड, किशन नगर चौक, बल्लूपुर चौक, कांवली रोड, बल्लीपुर चौक और प्रेमनगर क्षेत्रों में मेडिकल स्टोरों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में बच्चों को दी जाने वाली खांसी और सर्दी-जुकाम की दवाओं के क्रय-विक्रय पर तत्काल रोक लगाई गई। जिन दुकानों में यह दवाएं भंडारित थीं, उन्हें मौके पर सील कर दिया गया। विक्रेताओं को निर्देशित किया गया कि इन औषधियों का विक्रय अगली सूचना तक न करें। निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि कई विक्रेताओं ने स्वयं संज्ञान लेकर इन दवाओं को पहले ही दुकान से हटा दिया था। टीम ने मौके पर 11 सिरप के नमूने जांच के लिए लिए। जांच में Coldrif, Respifresh-TR और Relife जैसे सिरप किसी भी मेडिकल स्टोर में उपलब्ध नहीं पाए गए।

उधम सिंह नगर में 40 नमूनों की जांच हेतु भेजे


प्रदेश में बच्चों के लिए बनाए गए खांसी के सिरप पर कार्रवाई के तहत उधम सिंह नगर जनपद में औषधि विभाग की टीम ने अभियान तेज कर दिया है। वरिष्ठ औषधि निरीक्षक नीरज कुमार और औषधि निरीक्षक निधि शर्मा के नेतृत्व में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से कुल 10 पेडियाट्रिक कफ सिरप के नमूने जांच हेतु लिए गए हैं। इन सिरप में Dextromethorphan Hydrobromide, Chlorpheniramine Maleate और Phenylepherine Hydrochloride जैसे तत्व पाए गए हैं। अब तक जिले से कुल 40 कफ सिरप नमूने फॉर्म-17 में लेकर विश्लेषण के लिए प्रयोगशाला भेजे जा चुके हैं।

हरिद्वार व रुड़की में भी सख्त कार्रवाई, 15 नमूने जांच हेतु भेजे


इसी क्रम में हरिद्वार जनपद में भी औषधि विभाग ने अभियान को और तेज किया है। अपर आयुक्त के निर्देशों पर रुड़की के एयरन हॉस्पिटल, विनय विशाल हॉस्पिटल तथा हरिद्वार के मेट्रो हॉस्पिटल से कुल 15 कफ सिरप के नमूने परीक्षण हेतु लिए गए हैं। औषधि निरीक्षक अनीता भारती के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई के दौरान संबंधित प्रतिष्ठानों से लिए गए नमूनों को विश्लेषण के लिए भेज दिया गया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, हरिद्वार जिले से अब तक कुल 39 नमूने जांच हेतु लिए जा चुके हैं।

हल्द्वानी में सरकारी अस्पताल से लिए गए नमूने


नैनीताल जनपद के हल्द्वानी में भी एफडीए की कार्रवाई जारी रही। Soban Singh Jeena Base Hospital की ड्रग स्टोर से तीन कफ सिरप के नमूने जांच के लिए लिए गए। सभी नमूनों को गुणवत्ता परीक्षण हेतु औषधि विश्लेषणशाला, देहरादून भेजा गया है।

कोटद्वार में ‘Respifresh TR’ सिरप का स्टॉक सीज


पौड़ी जिले के कोटद्वार में एफडीए टीम ने कल रात से छापेमारी अभियान चलाया, जो आज भी जारी रहा। कार्रवाई के दौरान जानलेवा घोषित Respifresh TR कफ सिरप का स्टॉक कई मेडिकल स्टोरों से सीज किया गया। आज भी टीम ने विभिन्न प्रतिष्ठानों से तीन नए नमूने परीक्षण के लिए लिए हैं।

चौखुटिया-चांदीखेत में भी सख्त कार्रवाई


अल्मोड़ा जिले के चौखुटिया और चांदीखेत में आज एफडीए की टीम ने छह मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी की। निरीक्षण के दौरान Respifresh TR सिरप (Batch No. R01GL2523) की 12 बोतलें जब्त की गईं। यह सिरप पहले ही एनएसक्यू (Non-Suitable Quality) घोषित किया जा चुका है। टीम ने चार कफ सिरप के नमूने जांच हेतु एकत्र किए।

रुद्रप्रयाग में 4 नमूने लिए गए, सैंपल भेजे जांच को


रुद्रप्रयाग जनपद  के तिलवाड़ा क्षेत्र में औषधि निरीक्षकों की टीम ने रिटेल और थोक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर चार नमूने कफ सिरप के लिए संकलित किए। दवाओं की गुणवत्ता जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

उत्तरकाशी में चार सिरपों पर प्रतिबंध


जनपद उत्तरकाशी में औषधि निरीक्षक मोहम्मद ताजिम के नेतृत्व में छापेमारी की गई। टीम ने बच्चों में प्रयुक्त चार प्रकार के कफ सिरपों के नमूने लिए और देहरादून की प्रयोगशाला को भेजे। औषधि निरीक्षक ने सभी मेडिकल स्टोर संचालकों को चेतावनी दी कि निम्नलिखित सिरप किसी भी हालत में न रखें और न बेचें — Dextromethorphan Hydrobromide Syrup (KL-25/148), Coldrif (SR-13), Respifresh TR (R01GL2523) और Relife (LSL25160)। साथ ही निर्देश दिए गए कि 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप बिल्कुल न दिया जाए और वयस्कों को भी केवल डॉक्टर की सलाह पर ही दवाएं दी जाएं।

अब तक 148 नमूने जांच के लिए भेजे गए


प्रदेशभर में जारी छापेमारी के दौरान अब तक 148 नमूने जांच के लिए भेजे गये। इसके साथ ही आज देहरादून में 11, कोटद्वार में 3, हल्द्वानी में 3, अल्मोड़ा में 4, रुद्रप्रयाग में 4 और उत्तरकाशी में 4 नमूने लिए गए हैं। अभियान के दौरान दर्जनों प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किया गया है और कई स्थानों पर संदिग्ध स्टॉक जब्त कर सीलिंग की कार्रवाई की गई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा बच्चों के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। हमारी सरकार हर उस तत्व के खिलाफ सख्त है जो बच्चों की जान से खिलवाड़ करने की कोशिश करेगा। दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा पर किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। यह कार्रवाई बच्चों के जीवन की सुरक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का बयान


स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा एफडीए की कार्रवाई यह संदेश दे रही है कि उत्तराखंड में बच्चों की सेहत सर्वोच्च प्राथमिकता है। जनता से अपील है कि बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी सिरप या दवा बच्चों को न दें। राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि केवल प्रमाणित और सुरक्षित औषधियां ही जनता तक पहुंचें।

स्वास्थ्य सचिव व आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान


स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा राज्यभर में एफडीए की टीमें सक्रिय हैं। जिन सिरपों को जांच के लिए भेजा गया है, उनकी रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सभी जिलों में मेडिकल स्टोरों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि संदिग्ध बैच नंबर की औषधियां तुरंत हटाई जाएं।

ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी का बयान


अपर आयुक्त और ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी ने कहा एफडीए का अभियान निरंतर जारी रहेगा। पिछले चार दिनों में 27 नमूने जांच हेतु लिए जा चुके हैं और कई प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए गए हैं। विभाग की टीमें दिन-रात फील्ड में सक्रिय हैं। हमारा लक्ष्य है कि किसी भी असुरक्षित औषधि को बाजार से पूरी तरह समाप्त किया जाए।

एफडीए की जनता से अपील


एफडीए ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि यदि किसी मेडिकल स्टोर या वितरक के पास उपरोक्त प्रतिबंधित सिरप पाया जाए तो तुरंत स्थानीय औषधि निरीक्षक या एफडीए कार्यालय को सूचित करें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ लाइसेंस निरस्तीकरण, जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर जो निर्णायक कदम उठाया है, वह प्रदेश में स्वास्थ्य सुरक्षा की नई मिसाल है। औषधि विभाग की यह मुहिम न सिर्फ संदिग्ध औषधियों पर रोक लगाने में अहम भूमिका निभा रही है, बल्कि यह संदेश भी दे रही है कि धामी सरकार बच्चों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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स्वास्थ्य जांच को मिशन बनाएं महिलाएं- रेखा आर्या https://oneindiatimes.com/women-should-make-health-check-up-a-mission-rekha-arya/ https://oneindiatimes.com/women-should-make-health-check-up-a-mission-rekha-arya/#respond Wed, 17 Sep 2025 17:03:44 +0000 https://oneindiatimes.com/?p=42213

प्रदेश में शुरू हुआ स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान

देहरादून। बुधवार को दून मेडिकल कॉलेज सभागार में आयोजित स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान कार्यक्रम के साथ ही प्रदेश भर में भी महिलाओं की स्वास्थ्य जांच के लिए शिविर शुरू हो गए। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने प्रदेश की महिलाओं से मिशन मोड में इस अभियान के तहत अपनी स्वास्थ्य जांच कराने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश की धरती से वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने देश की प्रगति के लिए महिलाओं के सशक्त होने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने देश की खुशहाली के लिए महिलाओं के अच्छे स्वास्थ्य को अनिवार्य बताया।

कार्यक्रम के बाद महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि इस अभियान के तहत 2 अक्टूबर तक प्रदेश भर में मेडिकल शिविर चलेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सभी किशोरियों और महिलाओं को इन शिविरों में अपने स्वास्थ्य का परीक्षण अवश्य करना चाहिए।

रेखा आर्या ने कहा कि महिलाएं पूरी तरह स्वस्थ होगी तो इसे पूरे परिवार की उत्पादकता बढ़ेगी और इससे प्रदेश सशक्त बनेगा।

इसके पहले कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने आयोजन स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनियों और स्टालों का निरीक्षण किया और विभिन्न उत्पादों की जानकारी ली। उन्होंने नई किस्म की नगदी फसल उगाने वाले कई किसानों से भी बातचीत की और उनका अनुभव जाना। कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने महिलाओं द्वारा तैयार किए गए विभिन्न उत्पादों की गुणवत्ता और उपयोगिता की प्रशंसा कर उनका उत्साह बढ़ाया।

इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह, मुख्यमंत्री पुष्कर धामी, सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह, कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत, विधायक खजान दास, विनोद चमोली, सविता कपूर व अधिकारी गण मौजूद रहे।

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श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में धूमधाम से हुआ वर्ल्ड फिजियोथेरेपी डे सेलिब्रेशन। https://oneindiatimes.com/world-physiotherapy-day-was-celebrated-with-great-pomp-at-shri-mahant-indiresh-hospital/ https://oneindiatimes.com/world-physiotherapy-day-was-celebrated-with-great-pomp-at-shri-mahant-indiresh-hospital/#respond Mon, 08 Sep 2025 13:29:37 +0000 https://oneindiatimes.com/?p=42132

छात्र-छात्राओं ने पोस्टर, कविता और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से फिजियोथेरेपी का महत्व बताया

देहरादून। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में सोमवार को वल्र्ड फिजियोथेरेपी दिवस धूमधाम के साथ मनाया गया। श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ पैरामैडिकल एंड एलाइड हेल्थ साइंसेज की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने बढ़चढ़कर भागीदारी की। इस वर्ष वल्र्ड फिजियोथेरेपी दिवस की थीम हेल्थ एजिंग (स्वस्थ बुढ़ापा) रही। इसी कड़ी में पैरामैडिकल छात्र-छात्राओं ने पोस्टर प्रतियोगिता के माध्यम से यह संदेश दिया कि नियमित फिजियोथेरेपी से स्वस्थ, सक्रिय और आत्मनिर्भर जीवन संभव है। पोस्टर प्रदर्शनी में दर्शकों को उम्र के हर पड़ाव पर फिट रहने के उपायों से अवगत कराया गया। पोस्टर प्रतियोगिता में बीपीटी के शोहेब नेे प्रथम, बीपीटी की निधि ने द्वितीय और सान्या ने तृतीय पुरस्कार जीता। पोस्टर प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित कर प्रोत्साहित किया गया। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के चेयरमैन श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने कार्यक्रम आयोजकों को आशीर्वाद एवम् शुभकामनाएं दीं।

सोमवार को श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के ऑडिटोरियम में श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के को-ऑर्डिनेटर डॉ. आर.पी. सिंह, अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल मलिक, चिकित्सा अधीक्षक डाॅ अजय पंडिता, डीन डॉ. कीर्ति सिंह और फिजियोथेरेपी विभागाध्यक्ष डॉ. शारदा शर्मा व डाॅ नीरज कुमार ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। एमपीटी तृतीय वर्ष की छात्राओं ने गणेश वंदना प्रस्तुत की। बीपीटी प्रथम वर्ष की छात्रा दिव्या ने कविता के माध्यम से फिजियोथेरेपी की महत्ता को हृदयस्पर्शी शब्दों में रखा। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से छात्र-छात्राओं ने स्वस्थ बुढ़ापा विषय का मार्मिक चित्रण किया। फिजियोथेरेपी के छात्र-छात्राओं ने हिमाचली, गढ़वाली, पंजाबी व भोजपुरी गीतों से देश के विभिन्न राज्यों की कला एवम् संस्कृति की मनमोहक झलक पेश की। बाॅलीवुड गीतों पर छात्र-छात्राओं की मनमोहक प्रस्तुतियों ने युवा धड़कनों को और तेज कर दिया।

फिजियोथेरेपी विभाग ने केक काटकर दिवस को और खास बना दिया। विभागाध्यक्ष डॉ. शारदा शर्मा ने कहा कि “फिजियोथेरेपी केवल रोगों के इलाज का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने का विज्ञान है। बढ़ती उम्र में यह हमारी सबसे बड़ी संबल बन सकती है।” ज्ञात हो कि वल्र्ड फिजियोथेरेपी दिवस हर वर्ष 08 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है। यह दिन विश्व भर के फिजियोथेरेपिस्टों को एकजुट होकर लोगों में स्वास्थ्य-जागरूकता फैलाने और फिजियोथेरेपी की अहमियत बताने का अवसर प्रदान करता है। कार्यक्रम को सफल बनाने में डाॅ संदीप कुमार, डाॅ शमा परवीन, डाॅ तबस्सुम, डाॅ सुरभी, डाॅ रविन्द्र, डाॅ आकांक्षा, डाॅ अभिषेक, डाॅ सुशांत, डाॅ विशाल व डाॅ जयदेव का विशेष सहयोग रहा।

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स्वास्थ्य विभाग में 300 चिकित्सकों की और होगी भर्तीः डाॅ. धन सिंह रावत https://oneindiatimes.com/300-more-doctors-will-be-recruited-in-the-health-department-dr-dhan-singh-rawat/ https://oneindiatimes.com/300-more-doctors-will-be-recruited-in-the-health-department-dr-dhan-singh-rawat/#respond Sun, 07 Sep 2025 12:46:01 +0000 https://oneindiatimes.com/?p=42110

लम्बे समय से गैरहारिज 56 बाॅण्डधारी डाॅक्टरों की सेवाएं समाप्त

कहा, लापरवाह चिकित्सकों के भरोसे नहीं छोड़ सकते हेल्थ सिस्टम

देहरादून: चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 300 और चिकित्सकों की शीघ्र भर्ती की जायेगी। इसके लिये विभागीय अधिकारियों को राज्य चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को अधियाचन भेजने के निर्देश दे दिये हैं। इसके अलावा विभाग में लम्बे समय से गैरहाजिर चल रहे 56 बाॅण्डधारी डाॅक्टरों की सेवाएं समाप्त कर दी गई है। सेवा से बर्खास्त इन चिकित्सकों से मेडिकल काॅलेज को अनुबंध के अनुरूप बाॅंड की धनराशी वसूलने के निर्देश भी दे दिये गये हैं।

सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी बयान में बताया कि हाल ही में स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संवर्ग में चिकित्साधिकारी (बैकलॉग) के 220 पदों पर डाॅक्टरों की भर्ती की गई, जिनको प्रदेश के सुदूरवर्ती स्वास्थ्य केन्द्रों पर तैनाती भी दे दी गई है। इसके अलावा विभाग में चिकित्सकों के करीब 300 पद रिक्त पड़े हैं। इन पदों पर शीघ्र भर्ती के लिये विभागीय अधिकारियों को रोस्टर तैयार कर उत्तराखंड चिकित्सा सेवा चयन बोर्ड को अधियाचन भेजने के निर्देश दे दिये गये हैं, ताकि चयन बोर्ड समय पर भर्ती प्रक्रिया सम्पन्न कर विभाग को नये चिकित्सक उपलब्ध करा सके।

विभागीय मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में बेहतर हेल्थ सिस्टम तैयार करने में जुटी है, जिसके तहत सरकार सुदूरवर्ती क्षेत्रों की स्वास्थ्य इकाईयों में ढ़ांचागत व्यवस्थाओं से लेकर चिकित्सकों की तैनाती भी कर रही है, ताकि आमजन को निकटतम अस्पतालों में बेहतर उपचार सुनिश्चित किया जा सके। इसके अलावा सरकार ऐसे कार्मिकों को बाहर का रास्ता भी दिखने से गुरेज नहीं कर ही है जो अपनी जिम्मेदारियों के प्रति लापरवाह हैं। इसी क्रम में सरकार ने विगत माह राजकीय मेडिकल काॅलेजों से पासआउट 234 गैरहाजिर बाॅण्डधारी चिकित्सकों के विरूद्ध वसूली के साथ ही बर्खास्तगी की कार्रवाई के निर्देश अधकारियों को दिये थे। जिसके फलस्वरूप गयाब चल रहे 178 चिकित्सकों ने वापस विभाग में ज्वाइनिंग दे दी है। जबकि 56 चिकित्सकों ने अंतिम चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया। इन सभी गैरहाजिर 56 चिकित्सकों को बर्खास्त कर दिया गया है, साथ ही निदेशक चिकित्सा शिक्षा को गैरहाजिर सभी चिकित्सकों से बाण्ड की शर्तों के अनुरूप बाण्ड की धनराशि वसूलने के निर्देश भी दिये हैं।

डाॅ. रावत ने बताया कि बताया कि प्रदेश के राजकीय मेडिकल काॅलेजों में एक अनुबंध के तहत छात्र-छात्राओं को न्यूनतम फीस में एमबीबीएस पढ़ाई कराई जाती है। इस अनुबंध के तहत इन छात्र-छात्राओं को एमबीबीएस की पढ़ाई सम्पन्न होने के बाद सूबे के पर्वतीय जनपदों के चिकित्सा इकाईयों में 5 वर्षों की सेवाएं देना अनिवार्य है। ऐसा न करने की स्थिति में इन चिकित्सकों को बाण्ड में निर्धारित धनराशि जमाकर विभाग से एनओसी लेनी होती है, तभी इन्हें इनके शैक्षिक प्रमाण पत्र लौटाये जाते हैं। अनुबंध की शर्तों का पालन न करने पर चिकित्सकों से बांड में निर्धारित धनराशि वसूलने का प्रावधान है।

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उत्तराखंड में कोविड-19 को लेकर एडवाइजरी जारी https://oneindiatimes.com/advisory-issued-regarding-covid-19-in-uttarakhand/ https://oneindiatimes.com/advisory-issued-regarding-covid-19-in-uttarakhand/#respond Wed, 04 Jun 2025 15:04:57 +0000 https://oneindiatimes.com/?p=42065

निगरानी तंत्र और संसाधनों को सक्रिय रखने के निर्देश

राज्य में स्थिति पूरी तरह सामान्य, लेकिन एहतियात जरूरी – डॉ. कुमार

देहरादून। उत्तराखंड में कोविड-19 के संभावित खतरों से बचाव और सतर्कता के मद्देनज़र स्वास्थ्य विभाग ने विशेष एडवाइजरी जारी की है।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि इसके तहत सभी जिलों में निगरानी तंत्र को और अधिक सुदृढ़ करने, अस्पतालों में आवश्यक संसाधन और व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने तथा संक्रमण से बचाव के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि “राज्य में फिलहाल कोविड को लेकर स्थिति पूरी तरह सामान्य है, लेकिन किसी भी संभावित जोखिम के लिए हमें पूरी तरह तैयार रहना होगा।”

इसी क्रम में प्रदेशभर में स्वास्थ्य सुविधाओं, उपकरणों और मानव संसाधनों को सक्रिय मोड में रखा गया है। स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि वर्तमान में भारत सरकार द्वारा कोविड-19 को लेकर किसी खतरे की स्थिति घोषित नहीं की गई है। न ही कोई नया वेरिएंट सक्रिय रूप से फैल रहा है। संक्रमितों में भी केवल मामूली लक्षण पाए जा रहे हैं और वे सामान्य इलाज से घर पर ही ठीक हो रहे हैं। फिर भी संभावित खतरों से निपटने के लिए राज्य पूरी तरह सतर्क और तैयार है।

जिलों को दिए गए विशेष निर्देश
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि, ऑक्सीजन, दवा और उपकरण पूरी तरह चालू रखने को कहा स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी जिलाधिकारियों, मुख्य चिकित्सा अधिकारियों, मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्यों और मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों को यह निर्देशित किया गया है कि अस्पतालों में पर्याप्त बिस्तरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। ऑक्सीजन सप्लाई, जरूरी दवाएं और उपकरण जैसे वेंटिलेटर, BiPAP मशीनें, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और PSA ऑक्सीजन संयंत्र पूरी तरह कार्यशील स्थिति में रहें।

निगरानी तंत्र को सुदृढ़ बनाने पर ज़ोर
सचिव ने निगरानी प्रणाली को और अधिक मजबूत करने के निर्देश भी दिए हैं। इसके तहत इन्फ्लुएंजा जैसे लक्षण (ILI), गंभीर तीव्र श्वसन संक्रमण (SARI) और कोविड के मामलों की अनिवार्य रिपोर्टिंग की जाए। सभी सरकारी व निजी स्वास्थ्य संस्थाएं और लैब्स प्रतिदिन IHIP पोर्टल पर रिपोर्ट अपलोड करें। ICMR के कोविड-19 परीक्षण दिशा-निर्देशों के अनुसार जांच कराई जाए। SARI और ILI मामलों की संख्या बढ़ाई जाए और सभी SARI मामलों की जांच अनिवार्य रूप से हो।

नए वेरिएंट की समय रहते पहचान
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि कोविड पॉजिटिव सभी सैंपल को WGS (Whole Genome Sequencing) हेतु भेजा जाए ताकि संभावित नए वेरिएंट की समय रहते पहचान हो सके। कोविड प्रबंधन में लगे स्टाफ के लिए रिफ्रेशर ट्रेनिंग कराई जाए और राज्य को प्रतिदिन स्थिति की रिपोर्ट भेजी जाए।

सतर्कता और जन सहयोग
स्वास्थ्य सचिव ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे अफवाहों से बचें, जिम्मेदार नागरिक की तरह व्यवहार करें और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करें। सतर्कता और सहयोग से ही हम भविष्य में भी कोविड जैसी बीमारियों से सुरक्षित रह सकते हैं।

मीडिया समन्वय के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त
चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग ने कोविड-19 से जुड़ी सभी मीडिया समन्वय गतिविधियों के लिए राज्य स्तर पर अधिकारियों की नियुक्ति कर दी है। डाॅ. पंकज कुमार सिंह, सहायक निदेशक (आईडीएसपी-राज्य सर्विलांस अधिकारी) को कोविड-19 मीडिया समन्वय हेतु नोडल अधिकारी नामित किया गया है। उनकी सहायता के लिए डाॅ. सौरभ सिंह, सहायक निदेशक (आईडीएसपी, एनएचएम), को सह प्रभारी नियुक्त किया गया है। सरकार द्वारा स्पष्ट किया गया है कि इस कार्य के लिए दोनों अधिकारियों को किसी प्रकार का अतिरिक्त भत्ता देय नहीं होगा। विभागीय स्तर पर निर्देशित किया गया है कि उक्त आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

क्या करें और क्या न करें
स्वास्थ्य विभाग ने कोविड-19 को लेकर जन-सामान्य में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विशेष अभियान चलाने को कहा है। इसके तहत लोगों को ‘Do’s and Don’ts’ यानी क्या करें और क्या न करें के बारे में जानकारी दी जाएगी।

क्या करें (Do’s):
छींकते या खांसते समय रूमाल/टिशू से नाक-मुंह ढकें।
भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
हाथों को साबुन-पानी से अच्छी तरह धोते रहें।
पर्याप्त मात्रा में पानी और पौष्टिक आहार लें।
खांसी-बुखार जैसे लक्षण हों तो डॉक्टर से परामर्श लें।
लक्षण होने पर मास्क पहनें और दूसरों से दूरी रखें।
बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखें।

क्या न करें (Don’ts)

इस्तेमाल किए गए टिशू या रूमाल का दोबारा उपयोग न करें।
हाथ मिलाने से बचें।
लक्षण वाले लोगों के संपर्क से दूरी रखें।
डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न लें।
आंख, नाक और मुंह बार-बार न छुएं।
सार्वजनिक स्थानों पर थूकने से बचें।

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डायबिटीज को करना चाहते हैं कंट्रोल, तो इन दो प्रकार के आटे को करें अपने आहार में शामिल, मिलेगा लाभ  https://oneindiatimes.com/if-you-want-to-control-diabetes-then-include-these-two-types-of-flour-in-your-diet-you-will-get-benefits/ https://oneindiatimes.com/if-you-want-to-control-diabetes-then-include-these-two-types-of-flour-in-your-diet-you-will-get-benefits/#respond Tue, 15 Apr 2025 05:54:21 +0000 https://indiatimesgroup.com/?p=41978

डायबिटीज एक गंभीर बीमारी है जिसका खतरा सभी उम्र के लोगों में देखा जा रहा है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी इसका शिकार पाए जा रहे हैं। लाइफस्टाल और खान-पान में गड़बड़ी के कारण होने वाली इस बीमारी पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो इसके जानलेवा दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डायबिटीज से बचे रहना है या फिर इसे कंट्रोल में रखना है तो सबसे पहले अपने आहार में सुधार कर लें। खाने में लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स, लो कैलोरी और हाई फाइबर वाली चीजों को अधिक मात्रा में शामिल करें।

एक्सपर्ट्स कहते हैं, डायबिटीज को कंट्रोल में रखने के लिए आपको आटे में भी बदलाव करना चाहिए। अध्ययनों में दो प्रकार के आटे को डायबिटीज को कंट्रोल में रखने में लाभकारी प्रभावों वाला पाया गया है।

सोयाबीन के आटे को आहार में करें शामिल

शोध से पता चलता है कि मधुमेह में सोयाबीन का आटा खाना आपके लिए लाभप्रद हो सकता है। सोयाबीन लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला होने के साथ फाइबर और प्रोटीन का भी अच्छा स्रोत है जिससे शरीर में इंसुलिन के स्तर को बेहतर रखने में मदद मिलती है।

सोयाबीन के आटे में सोडियम, पोटेशियम, आयरन और प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो हड्डियों को पोषण देते हैं और टूटने के खतरे को कम करते हैं। इस आटे के सेवन से मांसपेशियों में होने वाले दर्द में भी काफी राहत मिलती है। अगर आप लंबे समय से अपने मोटापे को कम करने के लिए प्रयास कर रहे हैं तो डाइट में सोयाबीन के आटे से बनी रोटी को शामिल कर सकते हैं।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

इस आटे से बनी रोटी के सेवन से पेट लंबे समय तक भरा रहता है और आप अतिरिक्त खाने से बच जाते हैं। जिससे धीरे-धीरे वजन कम होने लगता है, इससे डायबिटीज भी कंट्रोल में आने लगती है। बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी इसके लाभ देखे गए हैं, जिससे हार्ट अटैक और हार्ट स्ट्रोक का खतरा भी कम हो सकता है।

आहार विशेषज्ञ नेहा पठानिया कहती हैं, सोयाबीन के आटे का ग्लाइसेमिक इंडेक्स काफी कम होता है और इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा भी कम होती है। मधुमेह के मरीजों के लिए इस आटे से बनी रोटी काफी फायदेमंद होती है। हालांकि अगर आपको कोई बीमारी या एलर्जी की समस्या है, तो आहार विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही सोयाबीन आटे का सेवन करें। इसे गेहूं के आटे में मिलाकर इसकी रोटियां बनाकर भी खाई जा सकती है।

डायबिटीज में फायदेमंद है कटहल का आटा

सोयाबीन की ही तरह हरे कटहल के आटे को भी अध्ययनों में डायबिटीज के मरीजों लिए फायदेमंद पाया गया है। शोधकर्ताओं ने बताया कि हरे कटहल के आटे का इस्तेमाल करने से टाइप-2 डायबिटीज के रोगियों को काफी लाभ मिल सकता है।

कटहल का आटा मधुमेह रोगियों में प्लाज्मा शर्करा के स्तर को कम करने और ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन (HbA1c) को नियंत्रित करने में काफी कारगर गया था। ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन का बढ़ना, मधुमेह का संकेत माना जाता है।

मरीजों पर देखे गए अच्छे परिणाम

शोधकर्ताओं ने हरे कटहल के आटे के प्रभाव को जानने के लिए 12 सप्ताह तक 40 प्रतिभागियों (24 पुरुषों और 16 महिलाओं) पर अध्ययन किया। प्रतिभागियों को दैनिक भोजन के साथ हरे कटहल के आटे से तैयार चीजें खाने को दी गईं।

इस अध्ययन के परिणाम को अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के वार्षिक सम्मेलन में रखा गया। शोधकर्ताओं ने बताया कि हरे कटहल के आटे के नियमित सेवन से टाइप-2 डायबिटीज रोगियों में ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

(साभार)

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