Headline
मुख्यमंत्री ने प्रदान की विभिन्न विकास योजनाओं एवं निर्माण कार्यों के लिए ₹ 62 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति
पर्यटन सीजन में खाद्य सुरक्षा पर प्रशासन सख्त, होटल-रेस्तरां से अधिक नमूने लेने के निर्देश
27 जुलाई से शुरू होगा “डिजिटल यूथ फेस्टिवल” राज्य युवा महोत्सव के अंतर्गत युवाओं को मिलेगा फिटनेस, संस्कृति एवं डिजिटल प्रतिभा प्रदर्शन का मंच
ऑरेंज अलर्ट के बीच सरकार अलर्ट मोड में, ग्रामीण सड़कें जल्द खोलने के निर्देश
कारगिल विजय दिवस पर मुख्यमंत्री धामी ने वीर सैनिकों, पूर्व सैनिकों और वीरांगनाओं का किया सम्मान
पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट का निधन, उत्तराखंड की राजनीति में शोक की लहर
नैनीताल में उद्योग मित्र बैठक: सीडीओ ने उद्यमियों की समस्याओं के त्वरित समाधान के दिए निर्देश
जनता मिलन में आयुक्त दीपक रावत का एक्शन, भूमि विवाद से लेकर धोखाधड़ी तक कई मामलों में दिए तत्काल निर्देश
दून पुलिस ने वाहन चोरी का किया खुलासा, शातिर चोर गिरफ्तार

ज्योर्तिमठ(चमोली): बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) में चढ़ावे की धनराशि में कथित हेराफेरी का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि समिति की व्यवस्थाओं पर एक और गंभीर सवाल खड़ा हो गया है। ताजा विवाद मंदिर समिति को विभिन्न कालखंडों में दानदाताओं द्वारा भेंट किए गए तीन महत्वपूर्ण वाहनों—दो हाईटेक एंबुलेंस और एक टेंपो ट्रेवलर—के बदरीनाथ धाम से गायब होने से जुड़ा है। हैरानी की बात यह है कि समिति के शीर्ष अधिकारियों को भी वर्तमान में इन वाहनों की सटीक लोकेशन की कोई जानकारी नहीं है।

 प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2018 में एक श्रद्धालु ने बीकेटीसी को आधुनिक चिकित्सा उपकरणों से सुसज्जित एक हाईटेक एंबुलेंस दान में दी थी। इसके बाद, देवस्थानम बोर्ड के गठन के दौरान एक अन्य दानदाता ने भी वैसी ही एक और अत्याधुनिक एंबुलेंस समिति को सौंपी थी। इन दोनों एंबुलेंसों का मुख्य उद्देश्य बदरीनाथ धाम पहुंचने वाले लाखों श्रद्धालुओं को किसी भी स्वास्थ्य आपातकाल (मेडिकल इमरजेंसी) के दौरान तत्काल और त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना था।

स्थानीय सूत्रों और तीर्थ पुरोहितों का दावा है कि इन दोनों एंबुलेंसों को कभी भी बदरीनाथ में नियमित रूप से चलते या मरीजों की सेवा करते नहीं देखा गया। इस संबंध में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत भी जानकारी मांगी गई थी, लेकिन मंदिर समिति की ओर से कोई स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, जिससे इन वाहनों के दुरुपयोग या गायब होने की आशंका गहरा गई है।

 विवाद का दूसरा सिरा वर्ष 2010 से जुड़ा है, जब ज्योतिर्मठ पीठ के ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने बीकेटीसी को एक टेंपो ट्रेवलर दान में दिया था। इसका एकमात्र उद्देश्य असहाय, बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को बदरीनाथ बस अड्डे से मंदिर के मुख्य द्वार के समीप तक बिल्कुल निशुल्क पहुंचाना था, ताकि उन्हें पैदल चलने की कठिनाई से राहत मिल सके।

आरोप है कि इस सेवा वाहन का उपयोग लंबे समय से अधिकारियों और कर्मचारियों के निजी व प्रशासनिक कार्यों के लिए किया जा रहा था। बीते जून महीने में इसे कर्मचारियों के आवागमन के लिए बदरीनाथ से देहरादून भेजा गया था, लेकिन अब यह वाहन देहरादून में भी मौजूद नहीं है।

 इस पूरे मामले पर बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी (CEO) सोहन सिंह रांगड़ ने बेहद चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें दान में मिली दोनों हाईटेक एंबुलेंसों के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है और वे इस संबंध में रिकॉर्ड खंगालकर जानकारी जुटाएंगे। वहीं, टेंपो ट्रेवलर के मामले पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उसमें कुछ तकनीकी खराबी आ गई थी, जिसके कारण उसे ठीक कराने के लिए देहरादून ले जाया गया था। हालांकि, वह वर्तमान में कहाँ और किस स्थिति में है, इसे लेकर उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि वे इस मामले को “दिखवाएंगे”।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top