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देहरादून। उत्तराखंड को नशामुक्त बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग और फूड एंड ड्रग्स डिपार्टमेंट ने मिलकर एक बड़ी पहल शुरू की है। राज्य में पहली बार क्विक रिएक्शन टीम (क्यूआरटी) का गठन किया गया है, जिसका उद्देश्य अवैध स्रोतों से आ रही दवाओं और नशे के कारोबार पर तुरंत कार्रवाई करना है।

क्या है टीम की खासियत

टीम की खासियत यह है कि जैसे ही किसी अवैध निर्माण इकाई या नशे से संबंधित गतिविधि की जानकारी विभाग को मिलती है, यह टीम तुरंत मौके पर पहुंचकर जांच करती है और आवश्यक कार्रवाई करती है। इसके अलावा, टीम संबंधित उद्योगों से संवाद भी करती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नशे का मूल स्रोत कहाँ है और इसे कैसे रोका जा सकता है।

जागरूकता अभियान भी चला रही टीम 

क्यूआरटी टीम  सिर्फ कार्रवाई तक ही सीमित नहीं है। यह टीम इंडस्ट्री एसोसिएशनों के साथ मिलकर लगातार जागरूकता अभियान भी चला रही है। फ़ार्मा उद्योग को बताया जा रहा है कि नकली और स्पूरियस कैटेगरी में आने वाली दवाओं को लेकर विभाग के पास सूचनाएं मिल रही हैं। ऐसे सेशंस से न केवल यूनिट्स की जिम्मेदारी बढ़ती है, बल्कि सूचना का आदान-प्रदान भी प्रभावी ढंग से हो पाता है।

 उद्योग के लोग समझे अपनी जिम्मेदारी 

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार का कहना है कि इस पहल से फ़ार्मा इंडस्ट्री में एक ओर जागरूकता फैलेगी तो दूसरी ओर अवैध गतिविधियों के खिलाफ डर भी पैदा होगा। उन्होंने बताया कि इस तरह के कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे, ताकि उद्योग से जुड़े लोग अपनी जिम्मेदारी को समझें और समाज को नशे से मुक्त बनाने में सहयोग करें।

अलग अलग सेक्टर में बटी क्यूआरटी टीम 

क्विक रिएक्शन टीम को अलग-अलग सेक्टर में बांटा गया है। हर टीम का नेतृत्व वरिष्ठ ड्रग इंस्पेक्टर कर रहे हैं और उनके साथ कनिष्ठ निरीक्षक भी शामिल हैं। इस प्रक्रिया से नए अधिकारियों को मौके पर जाकर कार्रवाई करने और तुरंत प्रतिक्रिया देने का अनुभव भी मिल रहा है।

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