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गुरुग्राम में AWPL के “विजय पर्व” कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने भेंट की।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का 133वाँ संस्करण सुना।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शहद निकालने की प्रक्रिया का अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में  प्रदेशभर से आए नागरिकों की समस्याएं सुनीं।
सीएम धामी ने बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों से फोन पर बात कर बधाई दी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एमडीडीए कॉम्प्लेक्स में स्व. हेमवती नंदन बहुगुणा की 107वीं जयंती पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी।
मुख्यमंत्री धामी ने समस्त प्रदेशवासियों को दी ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ की हार्दिक शुभकामनाएं
चारधाम यात्रा 2026 को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त बनाने का ऐतिहासिक पहल , ड्रोन से होगी कूड़ा और प्लास्टिक वेस्ट की मॉनिटरिंग

नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (8 नवंबर, 2024) सतर्कता जागरूकता सप्ताह 2024 के अवसर पर संबोधित किया और कहा कि हमारे समाज में ईमानदारी और अनुशासन को जीवन का आदर्श माना गया है। उन्होंने भारतीय संस्कृति की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्राचीन यात्रियों मेगस्थनीज और फाहियान ने भी भारतीयों की ईमानदारी और अनुशासन की सराहना की थी। इस वर्ष की थीम, ‘राष्ट्र की समृद्धि के लिए ईमानदारी की संस्कृति’ को उन्होंने अत्यंत प्रासंगिक बताया।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि विश्वास सामाजिक जीवन की नींव है और सरकार तथा जनता के बीच विश्वास को बनाए रखना शासन की शक्ति है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार केवल आर्थिक बाधा नहीं, बल्कि यह समाज में विश्वास और भाईचारे को भी प्रभावित करता है।

सरदार पटेल की जयंती पर लिए जाने वाले देश की एकता और अखंडता के संकल्प का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि इसे गंभीरता से लेना और निभाना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने भारतीय समाज में नैतिकता के महत्व को दोहराते हुए कहा कि यदि किसी कार्य को सही भावना और दृढ़ संकल्प से किया जाए, तो सफलता अवश्य मिलती है।

भ्रष्टाचार के उन्मूलन को लेकर, राष्ट्रपति ने कहा कि इसे असंभव मानना गलत है। उन्होंने भारत सरकार की “भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टोलरेंस” नीति पर विश्वास व्यक्त किया और कहा कि भ्रष्ट व्यक्तियों के विरुद्ध त्वरित कानूनी कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने आह्वान किया कि हर कार्य और व्यक्ति को संदेह की दृष्टि से देखने से बचना चाहिए और किसी भी कार्य का उद्देश्य न्याय और समानता की स्थापना होना चाहिए।

राष्ट्रपति के इस संबोधन ने ईमानदारी और अनुशासन के मूल्यों को पुनः जागृत किया है, जो भ्रष्टाचार-मुक्त और समृद्ध भारत के निर्माण के लिए आवश्यक हैं।

 

 

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